Apple Season: किलो के हिसाब से सेब बिक्री शुरू, बागवानी मंत्री बोले- सभी नियमों का पालन सुनिश्चित करें

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Apple Season: Sale of apples started on the basis of kg, Horticulture Minister said - make sure to follow all

शिमला की भट्टाकुफर मंडी में सेब बिक्री।
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश सरकार के आदेशों पर आढ़तियों ने मंडियों में किलो के हिसाब से सेब खरीद तो शुरू कर दी है लेकिन हर पेटी पर 2 किलो की अवैध काट जारी है। कार्टन के वजन के नाम पर आढ़ती 2 किलो सेब की कीमत काट रहे हैं। हालांकि बागवानी मंत्री ने पुरानी व्यवस्था के तहत किलो के हिसाब से बोली में ही कार्टन के वजन को समायोजित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को संयुक्त किसान मंच और सेब उत्पादक संघ ने पराला मंडी का दौरा कर किलो के हिसाब से सेब बिक्री की व्यवस्था को लेकर बागवानों और आढ़तियों की प्रतिक्रिया जानी।

इस दौरान बागवानों ने 2 किलो की अवैध काट पर नाराजगी जताई। मंडियों में पित्तू सेब को अलग बेचने से भी बागवानों को नुकसान हो रहा है। जब पेटी के हिसाब से सेब बिकता था तब पित्तू भी गड़ में बेचा जाता था। संयुक्त किसान मंच के सह संयोजक संजय चौहान और सेब उत्पादक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सोहन सिंह ठाकुर ने बताया कि दो किलो की काट सरासर अवैध है। सरकार के आदेशों के बावजूद मनमानी की जा रही है। पित्तू को अलग बेचने का तरीका भी गलत है, इस पर तुरंत रोक लगे। आढ़तियों से चर्चा में बागवानों को उपज का पैसा उपज बिकने के दिन ही देने पर भी बात हुई जिस पर आढ़तियों ने सहमति जताई।

किलो के हिसाब से मिला 200 रुपये का रिकॉर्ड रेट

किलो के हिसाब से सेब बिक्री शुरू होने के बाद बागवानों को उपज के रिकार्ड रेट मिल रहे हैं। देहा बलसन के युवा बागवान साहिल चौहान का डार्क बेरॉन गाला और किंग रॉट सेब 200 रुपये किलो के रिकार्ड रेट पर बिका। साहिल ने बताया कि पिछले साल जयपुर में उनका सेब 170 रुपये किलो बिका था। पराला में ट्रांसपोटेशन के कम खर्चे पर भी जयपुर से भी ज्यादा रेट मिले। पराला की केसी इंटरनेशनल के संचालक आयुष चौहान ने बताया कि सेब की पैकेजिंग, रंग और आकार बेहतरीन था। सूरत गुजरात की एएफसी अजगर फर्म ने यह सेब खरीदा।

किलाे के हिसाब से बिक्री में सहयोग करें : सोसायटी

हिमालयन एप्पल ग्रोवर्स सोसायटी के अध्यक्ष राजीव चौहान और महासचिव रणवीर झोहटा ने कहा कि किलो के हिसाब से सेब बिक्री की व्यवस्था को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए बागवानों को सरकार का पूरा सहयोग करना चाहिए। बागवान फसल को यूनिवर्सल ग्रेडिंग में पैक कर ही मंडियों में लाएं।

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