[ad_1]

लमही स्थित मुंशी प्रेंमचंद्र की पैतृक आवास का दरवाजा टूटा
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दुनिया को गांव, गरीबी और जनांदोलनों की कहानी के जरिये हिंदी की नई विधा से रूबरू कराने वाले कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कर्मस्थली दो दशक से अपने दिन बहुरने का इंतजार कर रही है। जयंती समारोह पर घोषणाओं का दौर पिछले 19 सालों से अनवरत जारी है। घोषणाओं का इंतजार करते-करते कथा सम्राट के मकान की दीवारें चटकने लगी हैं। दरवाजों को दीमक चाट रहे हैं। 31 जुलाई को जयंती समारोह मनाया जाना है। औपचारिकता के तौर पर यहां साफ-सफाई का काम तो शुरू हो गया लेकिन क्षतिग्रस्त दरवाजों और खिड़कियों का कोई पुरसाहाल नहीं है।
मुंशी प्रेमचंद के गांव में लमही में उनका पुश्तैनी मकान दो दशक से बदलाव का इंतजार कर रहा है। मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण ना तो सरकार आगे बढ़ पा रही है और ना ही कोई सामाजिक संस्था। आपसी खींचतान के चक्कर में मुंशी प्रेमचंद के नाम पर बनने वाला स्मारक अब तक मूर्त रूप नहीं ले सका है। पुश्तैनी मकान की बाहरी दीवारों पर सफेद रंग भी अब पीला पड़ने लगा है। प्रवेश द्वार से अंदर प्रवेश करते ही बाएं हाथ के कमरे का दरवाजा उखड़ चुका है। अंदर के कमरे का दरवाजा दीमक चाट गया है और वह कब्जे से निकलकर लटक गया है। ऊपरी मंजिल के कमरों के दरवाजों का भी यही हाल है। बरसात में तो पूरे मकान में पानी भर जाता है।
[ad_2]
Source link