[ad_1]

सिरमौर का लहसुन।
– फोटो : संवाद
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में इस मर्तबा लहसुन का कारोबार 740 करोड़ तक पहुंच गया है। अभी लहसुन की बिक्री का क्रम जारी है। 80 फीसदी के करीब फसल मंडियों में बेची जा चुकी है। जबकि, 20 फीसदी लहसुन का स्टॉक अभी भी जमा है। इस बार शुरूआती दौर में ही किसानों को पिछले साल के मुकाबले फसल के अच्छे दाम मिले। इस समय अच्छे ग्रेड का लहसुन 120 से 160 रुपये तक बिक रहा है।
अब तक लहसुन का जिले में करोड़ों का कारोबार हो चुका है। यहां का लहसुन दिल्ली समेत अन्य मंडियों से सीधे तमिलनाडु पहुंच रहा है। सिरमौर में इस बार 4,000 हेक्टेयर पर लहसुन की खेती की गई। जिले में 60,640 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है। पहले लहसुन की फसल रोग की चपेट में आने से किसानों की चिंता बढ़ गई थी। कई जगह लहसुन खराब होने से इसकी पैदावार में भी कमी आई।
शुरूआती दौर में ही किसानों ने ए ग्रेड लहसुन के दाम 150 रुपये तक मिले। हालांकि बीच में इसके दामों में उतार चढ़ाव भी देखने को मिला, लेकिन इसके दाम 100 रुपये से कम नहीं आए। लिहाजा, किसानों के लिए इस बार लहसुन फायदे का सौदा रहा।
बता दें कि जिला सिरमौर में उगने वाले लहसुन की देश और विदेशों में विशेष पहचान है। अच्छी मेडिशनल वैल्यू होने के चलते तमिलनाडु में भी भारी मांग रहती है। जिले में सबसे ज्यादा गिरिपार इलाके के नौहराधार, लानाचेता, संगड़ाह, हरिपुरधार के साथ साथ पच्छाद, शिलाई और नाहन के सैनधार इलाके में सबसे ज्यादा उत्पादन होता है।
पिछले साल लहसुन के दाम अधिकतम 70 से 80 रुपये तक स्थिर रहे। इसे देखते हुए कई किसानों ने इस साल कम फसल का उत्पादन किया। देश के मैदानी इलाकों में भी लहसुन की फसल पर मौसमी की मार के चलते इस बार दामों में उछाल रहा। इसका सीधा लाभ किसानों को मिला।
कृषि उपनिदेशक सिरमौर राजेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि इस बार लहसुन के अच्छे दाम किसानों को मिल रहे हैं। जिले मेंं इस बार 60,640 मीट्रिक टन लहसुन का उत्पादन हुआ है। अब तक 740 करोड़ के आसपास इसका कारोबार हो चुका है।
[ad_2]
Source link