यह बात साल 18 फरवरी 1946 की है ,जब रॉयल इंडियन नेवी के कुछ सैनिको और जहाजियों ने भूख हड़ताल की घोषणा की थी। वजह थी- नौ सेना में भारतीयों की हालत और उनके साथ बुरा व्यवहार। इसे ‘स्लो डाउन ‘हड़ताल भी कहा गया था ,जिसका अर्थ था कि जहाजी अपने कामो को धीरे -धीरे पूरा करेंगे। इस दौरान नेवी के शिप ‘एचएमआईएस तलवार’ के कमांडर ने नौसैनिक और जहाजियो को अपशब्द कहे ,जिसने स्थिति को और भी आक्रमक बना दिया। धीरे-धीरे हड़तालियों में 20,000 से ज्यादा सैनिक शामिल हो गए। पहले हड़तालियों की मांग बेहतर भोजन थी ,लेकिन बाद में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता में बदल गई। इस बीच एक जहाजी को गिरफ्त्तार कर लिया गया ,क्योकि उसने ‘भारत छोड़ो’ का नारा लगाया था। इस पर जहाजियों ने मुंबई के आसपास के क्षेत्रों में गाड़ियों में बैठकर ब्रिटिश शासन के खिलाफ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। उन्होंने कांग्रेस का झंडा लहराते हुए प्रदर्शन किया। जल्द ही आम लोग भी इन जहाजियो के साथ शामिल हो गए। हड़ताल को दबाने के लिए की गई पुलिस की गोलीबारी में कई लोग मारे गए। इस घटना ने ब्रिटिश शासन के अंत को देखने के भारतीय लोगो के संकलप को मजबूती दी। रॉयल इंडियन नेवी में हुई इस बगावत को रिन रिवोल्ट कहा जाता है।
RIN विद्रोह आज एक किंवदंती बना हुआ है। यह एक ऐसी घटना थी जिसने ब्रिटिश शासन के अंत को देखने के भारतीय लोगों के दृढ़ संकल्प को मज़बूती प्रदान की। यह विद्रोह धार्मिक समूहों के बीच गहरी एकजुटता और सौहार्द का प्रमाण था, जो उस समय देश में फैलती साम्प्रदायिक घृणा और वैमनस्यता के प्रतिउत्तर के रूप में प्रस्तुत हुआ। हालाँकि दुखद बात यह है कि यह ऐसा समय था जब दो प्रमुख समुदायों के बीच एकता की तुलना में सांप्रदायिक एकता प्रकृति में अधिक संगठनात्मक थी। इसकी परिणति कुछ ही महीनों के भीतर नज़र भी आ गई, भारत इतिहास के एक बेहद भयानक सांप्रदायिक संघर्ष का गवाह बना।
