CM नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट का हाल: मधेपुरा मेडिकल कालेज में 7 घंटे बत्ती गुल; आफत में रही 200 मरीजों की जान

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CM Nitish dream project Madhepura Medical College did not get electricity for 7 hours; 200 patients worried

अंधेरे में डूबा मधेपुरा मेडिकल कॉलेज एंड अस्पताल

बिहार के मधेपुरा जन नायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विभिन्न वार्डों में चार दिनों से बिजली नहीं है। बीते तीन दिनों से अस्पताल में लगाए गए 500 और 1000 किलोवाट के तीन डीजी सेट से लगातार काम लिया जा रहा था। लेकिन 31 जुलाई की शाम सात बजे के बाद डीजी ने भी जवाब दे दिया। इस वजह से पूरे मेडिकल कॉलेज अस्पताल परिसर में अंधेरा छा गया। इससे मरीजों और तीमारदारों के बीच अफरातफरी मच गई। लोग गंभीर मरीजों को लेकर भागने लगे। जो मरीज भाग नहीं सकते थे, परिजन उनका मोबाइल की रोशनी के सहारे इलाज करवाते देखे गए।

सात बजे से करीब तीन बजे अहले सुबह तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में स्थानीय स्तर पर जनरेटर की व्यवस्था करके किसी तरह इमरजेंसी वार्ड, ऑपरेशन थिएटर, ब्लड बैंक और विभिन्न वार्डों में बिजली सेवा बहाल की गई। समाचार लिखे जाने तक आज भी बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने में टेक्नीशियन लगे हैं।

संवेदनहीन विभाग और लापरवाह अधिकारी

जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल का भवन 800 करोड़ से अधिक की राशि से बना है। बनाने वाली कंपनी और सरकार का दावा है कि यह वर्ल्ड क्लास का मेडिकल कॉलेज अस्पताल है। इस परेशानी को देख कर आप समझ सकते हैं कि क्या यह सच में वर्ल्ड क्लास का ही मेडिकल कॉलेज है। जानकारी के मुताबिक जिस कंपनी ने इस मेडिकल कॉलेज में बिजली का काम किया, वह एक मल्टीनेशनल कंपनी है। कंपनी ने अस्पताल में जो सामान लगाया है वह भारत में बहुत कम मिलता है।

मेडिकल कॉलेज के स्टाफ ने बताया कि एक बार एक मशीन खराब हुई तो उसे 17 या 18 लाख में पोलैंड से मंगवाया गया था। नाम न छापने की शर्त पर बातों ही बातों में कर्मचारी और अधिकारियों ने बताया कि जिस वायरिंग और व्यवस्था को चलाने के लिए जूनियर इंजीनियर स्तर के बिजली विशेषज्ञ की जरूरत है, उस काम को हम लोग टेक्नीशियन के सहारे किसी तरह चलाते हैं। विभाग से कई बार एक्सपर्ट की मांग की गई, लेकिन कोई नहीं सुनता।

जनरेटर मंगवाकर की अहले सुबह की गई वैकल्पिक बिजली की व्यवस्था

डीएम के एक्शन पर हुई बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था

इस मामले को लेकर करीब 10:30 बजे रात में जिलाधिकारी से बात की गई। उन्होंने जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की बात कही। इस बीच जिला प्रशासन की ओर से सदर एसडीएम समेत दो अधिकारी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। फिर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर रात करीब दो बजे के बाद तक स्थानीय टेंट हाउस संचालकों से बड़े-बड़े जेनरेटर मंगवाए गए। उसके बाद अहले सुबह तीन बजे तक कुछ भागों में बिजली सेवा बहाल की गई।

फंसी रही 200 से अधिक मरीजों की जान

जब मेडिकल कॉलेज में बिजली गुल हुई उस दिन विभिन्न वार्ड, आईसीयू और इमरजेंसी में 200 से अधिक मरीज भर्ती थे। संयोग रहा कि करीब सात घंटे के ब्लैक आउट के बावजूद भी कोई अनहोनी घटना नहीं घटी। मरीज को लेकर उनके परिजन सरकारी और निजी अस्पतालों में दौड़ते-भागते दिखे।

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