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केदारनाथ पैदल मार्ग
– फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के तहत केदारनाथ को संवारा जा रहा है लेकिन केदारनाथ तक का पहुंच मार्ग अब भी सुरक्षित नहीं है। बीते छह वर्षों में पैदल मार्ग पर यात्रा के दौरान पहाड़ी से गिरे पत्थरों की चपेट में आने से 16 यात्रियों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी रास्ते पर सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हो पाए हैं। इन दिनों बारिश में कई जगहों पर निरंतर पत्थर गिरने का खतरा बना है।
केदारनाथ तक पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 16 किमी पैदल दूरी तय करनी होती है। यह रास्ता शुरू से ही भूस्खलन को लेकर अति संवेदनशील है। चिरबासा, छौड़ी, जंगलचट्टी, रामबाड़ा, लिनचोली और छानी कैंप भूस्खलन जे साथ ही एवलांच जोन भी है। यहां रास्ते पर ऊपरी तरफ से कब पत्थर गिर जाए, कहना मुश्किल है।
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