गौरीकुंड हादसा: ऊपर से दरकती पहाड़ी, नीचे नदी का ऊफान..चल रहा खोजबीन अभियान, खौफनाक मंजर बयां करती तस्वीरें

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डाटपुल के समीप हुए भूस्खलन हादसे में लापता लोगों की खोजबीन विपरित परिस्थितियों में हो रही है। ऊपरी से दरकती पहाड़ी और नीचे से मंदाकिनी नदी के ऊफान के बीच खाई क्षेत्र में जमा मलबे में बुलंद हौंसले के साथ रेस्क्यू जवान जुटे हुए हैं। यहां पर हालत काफी नाजुक हैं।

हल्की सी चूक स्वयं के जीवन पर भारी पड़ सकती है। बावजूद, पूरी मशक्कत के साथ प्रशासन व पुलिस द्वारा खोजबीन अभियान चलाया जा रहा है। रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर सोनप्रयाग से गौरीकुंड के बीच पांच किमी का हिस्सा काफी संकरा है। जहां पर भूस्खलन हुआ है, वहां पर सड़क बमुश्किल से साढ़े चार फीट ही चौड़ी है। बावजूद, रेस्क्यू में हाइड्रा मशीन का भी उपयोग किया जा रहा है। मशीन को तिरछा खड़ा कर, उसे जेसीबी से पूरा संतुलित किया जा रहा है।

हाइड्रा से क्रेन के सहारे नदी किनारे मलबे में लापता लोगों की खोजबीन हो रही है। यह पहला मौका है, जब किसी रेस्क्यू में हाइड्रा मशीन का उपयोग हो रहा है। अधिकारियों के अनुसार, हाइड्रा मशीन का आगे का हिस्सा काफी लंबा होता है, जिसमें क्रेन लगाकर काफी दूर तक किसी वस्तु को उठाया या पलटा जा सकता है।



इस रेस्क्यू में भी नदी किनारे पडे सिमेंट के भारी-भरकम स्लैब को पलटा जा रहा है, जिससे जवानों को खोजबीन में मदद मिल रही है।


इस रेस्क्यू अभियान में एनडीआरएफ के 12, एसडीआरएफ के 15, डीडीआरएफ के 10, वाईएमएस के 6 और पुलिस-होमर्गाड के 20 जवान शामिल हैं।


ये जवान बीते शुक्रवार से लापता लोगों की खोजबीन में जुटे हैं। इधर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार और उप जिलाधिकारी जितेंद्र वर्मा ने बताया कि शनिवार को सुबह 5 बजे से ही रेस्क्यू शुरू हो गया था।

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लगातार हो रही बारिश व प्रभावित हिस्से में हो रहे भूस्खलन से निरंतर खतरा बना है। जिस कारण कई बार रेस्क्यू को रोकना पड़ रहा है।

 


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