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वाराणसी में संत आग्रह पदयात्रा
– फोटो : अमर उजाला
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शिव की नगरी काशी को मांस-मदिरा मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए रविवार को आगमन संस्था और ब्रह्म सेना की ओर से विराट संत आग्रह पदयात्रा निकाली गई। इस पदयात्रा को 50 से अधिक मठों-मंदिरों के पीठाधीपति, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के संत-महंत का समर्थन मिला। सभी ने ‘मांस मदिरा मुक्त हो काशी, इसके हैं हम सब अभिलाषी’ का नारा बुलंद किया।
कश्मीरीगंज स्थित श्रीराम जानकी मंदिर से पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती महाराज के भेजे संबोधन पत्र को पढ़ा गया।अन्नपूर्णा मंदिर के महंत शंकर पुरी महाराज ने कहा कि यह संत आग्रह पदयात्रा नूतन काशी के पुरातन स्वरूप का एक अभिन्न अंग है।आधुनिकता और विलासिता पूर्ण जीवन के आदि हो चुके लोगों के लिए यह एक चेतावनी है। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की परिचायक काशी नगरी का मांस-मदिर से मुक्त होना इसके पौराणिक स्वरूप को बनाए रखने के लिए अत्यंत अनिवार्य है।
सुमेरुपीठ के शंकराचार्य नरेन्द्रनंद सरस्वती कहा कि वैसे तो सप्तपुरियों में सम्मिलित सभी नगरियों का महात्म्य बहुत ही विशेष है किन्तु काशी का वैशिष्ट इसलिए बढ़ जाता है कि यहां जीवित मनुष्य को ज्ञान और जीवन के उपरांत मोक्ष की प्राप्ति सहज रूप से होती है। इस महाश्मशान भूमि पर आदिदेव महादेव यहां दिवंगत होने वाले व्यक्ति के कान में स्वयं तारक मंत्र देते हैं। इस दृष्टि से संसार की दुर्लभ नगरी होने के नाते काशी में धार्मिक भावनाओं का पूर्ण रूपेण सम्मान होना चाहिए। मांस-मदिरा पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
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