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लेडी डॉक्टर (सांकेतिक तस्वीर)
– फोटो : अमर उजाला
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पश्चिमी दिल्ली में एम्स जैसी सुविधा देने के लिए शुरू हुआ 100 बेड का अस्पताल डॉक्टरों की कमी के चलते पूरी क्षमता से शुरू नहीं हो पाया है। अस्पताल प्रशासन ने कई बार डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए रिक्तियां निकाली, लेकिन अनुबंध पर कोई सीनियर डॉक्टर आने को तैयार नहीं है। अब हालत यह है कि अस्पताल की ओपीडी में सफदरजंग अस्पताल से ट्रेनिंग करने आ रहे डॉक्टर मरीजों का उपचार कर रहे हैं। डॉक्टरों के अभाव में यहां स्पेशलाइज्ड सेवाएं शुरू नहीं हो पाई।
विशेषज्ञों की माने तो एम्स, सफदरजंग जैसे बड़े अस्पतालों से मरीजों का बोझ कम करने के लिए नजफगढ़ के ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र को 100 बेड के अस्पताल में बदला गया। करीब छह माह पहले अस्पताल बनकर शुरू हो गया, लेकिन डॉक्टरों के अभाव में अस्पताल अभी भी डिस्पेंसरी के बराबर ही सेवाएं दे पा रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि प्रोफेसर, सहायक प्रोफेसर, सीनियर रेजिडेंट स्तर के डॉक्टरों के लिए अनुबंध पर काफी कम वेतन प्रस्तावित किया जा रहा है। इतने कम वेतन में काम करने से बेहतर है कि निजी अस्पतालों में प्रैक्टिस की जाए। इस अस्पताल में गायनी, बाल रोग, मेडिसन, नेत्रविज्ञान सहित अन्य सभी सेवाएं विकसित की गई हैं। अस्पताल के सभी बेड ऑक्सीजन से कनेक्ट हैं।
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