Shimla News: सड़क की निविदा प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती, विधायक और बेटे से जवाब तलब

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Road tender process challenged in High Court, response sought from MLA and son

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र में नाबार्ड के तहत बनने वाली सड़क की निविदा प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कांगड़ा के सरकारी ठेकेदार राजेंद्र सिंह राणा ने विधायक के लड़के पर फर्जी दस्तावेज बनाकर ठेकेदारी करने का आरोप लगाया है। अदालत ने राज्य सरकार सहित कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक और बेटे से जवाब तलब किया है। मामले की सुनवाई 12 सितंबर को निर्धारित की गई है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि स्थानीय विधायक के लड़के को फर्जी दस्तावेज के आधार पर निविदा प्रक्रिया में भाग लेने की छूट दी गई है।

यही नहीं, लोक निर्माण विभाग की तकनीकी मूल्यांकन समिति ने भी उसे योग्य घोषित कर दिया है। आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी करण राज सिंह ने तकनीकी बिड के साथ फर्जी दस्तावेज संलग्न किए हैं। अदालत को बताया गया कि लोनिवि ने 24 अप्रैल 2023 को नाबार्ड के तहत बनने वाली सड़क धतेहड़ महराना डुहक के लिए ऑनलाइन निविदा आमंत्रित की थी। इस सड़क को बनाने के लिए अनुमानित लागत 327.51 लाख रुपये रखी गई थी। जबकि 36.16 लाख रुपये इसके रखरखाव के लिए रखे गए थे।

इसके अलावा बोली लगाने के लिए 7.28 लाख रुपये की प्रतिभूति निर्धारित की गई थी। 11 मई 2023 ऑनलाइन निविदा भरने के लिए निर्धारित की गई थी। करण राज सिंह पर आरोप लगाया गया है कि उसने अपने पिता का शपथपत्र निविदा की बोली के साथ लगाया है। शपथपत्र में बताया गया है कि वह क्रशर और ठेकेदारी का काम 7 जुलाई 2022 से कर रहा है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि करण राज सिंह को लोनिवि ने 4 फरवरी 2023 को ठेकेदारी का लाइसेंस जारी किया गया। अदालत को बताया गया कि उसे यह लाइसेंस सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री के आधार पर दिया गया है।

जबकि शपथपत्र के अनुसार वह 21 वर्ष की आयु में सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री लिए बगैर ही ठेकेदारी का कार्य संभाल रहा था। आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी करण राज ने ठेकेदारी का लाइसेंस जारी होने से पहले का जीएसटी प्रमाण पत्र जमा करवाया है। इसके बावजूद भी लोनिवि की तकनीकी मूल्यांकन समिति ने उसे निविदा प्रक्रिया में योग्य घोषित कर दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई है कि लोनिवि की तकनीकी मूल्यांकन समिति सिफारिशों को रद्द किया जाए।

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