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Post Office at LoC Keran
– फोटो : Agency
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उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर किशनगंगा नदी के तट पर स्थित पिन कोड 193224 वाला डाकघर पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है। यह डॉक घर नदी के ठीक उस पार पाकिस्तान के कब्जे वाला क्षेत्र के सामने है। इसे नियंत्रण रेखा से सटे डाकघर के रूप में जाना जाता है।
बारामुला डिवीजन के अधीक्षक डाकघर अब्दुल हामिद कुमार ने कहा बताया कि पहले इसे अंतिम डाकघर के रूप में जाना जाता था, क्योंकि इससे आगे डिलीवरी नहीं कर सकते। फिर, सेना ने इसे एलओसी से सटे पहले डाकघर में बदल दिया।
इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि डाकघर भारत की आजादी या पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के पहले से ही काम कर रहा है। पोस्टमास्टर शाकिर भट ने कहा कि डाकघर, जो 1947 से यहां है, ने कभी भी अपनी सेवाएं बंद नहीं कीं।
भट्ट ने कहा, ‘संघर्ष विराम (2021 में भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता) से पहले बाहर जाना, मेल पहुंचाना या पोस्ट उठाना बहुत जोखिम भरा था। आज हम शांति महसूस कर रहे हैं और हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच शांति बनी रहे। 1993 में केरन सेक्टर में आई बाढ़ में डाकघर भी बह गया था।’
डाकघर में तीन कर्मचारी काम करते हैं, जो स्थानीय लोगों सहित सुरक्षा बलों को सेवाएं प्रदान करते हैं। भट्ट चाहते हैं कि शांति बनी रहे क्योंकि इससे केरन में पर्यटन आया है। उनका कहना है कि अगर क्षेत्र का विकास हो जाए तो यहां ऐतिहासिक डाक घर सीमावर्ती पर्यटन को बढ़ावा देने का जरिया बन सकता है।
कुपवाड़ा की उपायुक्त आयुषी सूदन ने कहा कि संचार कनेक्टिविटी के मुद्दों का समाधान किया जा रहा है और एक ऑप्टिकल फाइबर केबल परियोजना इस साल के अंत तक पूरी हो जानी चाहिए। हमारे पास पहले से ही पाइपलाइन में एक कनेक्टिविटी परियोजना है। हमें उम्मीद है कि ओएफसी लिंक इस साल के अंत तक पूरा हो जाएगा।
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