Independence Day 2023: अहमक फफूंदवी ने क्रांतिकारी बन चलाया था आंदोलन, स्मारक नहीं बनने का परिजनों को है मलाल

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सार

Auraiya News: वर्तमान में अहमक फफूंदवी के साहित्य की देखरेख फफूंद के मोहल्ला महाजनान में रह रहे उनके पौत्र खान मोहम्मद व आरिफ खान कर रहे हैं। क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानी अहमक फफूंदवी के पौत्र और पौत्रियों को दो पीढ़ी गुजरने के बाद भी स्वतंत्रता सेनानी परिवार का दर्जा हासिल नहीं हुआ।

Independence Day 2023, ahamak Fafundvi had started the movement as a revolutionary, Memorial not yet built

अहमक फफूंदवी की फाइल फोटो और उनकी लिखी किताब दिखाते बड़े पौत्र खान मोहम्मद
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


आजादी के लिए चलाए गए आंदोलन में अंग्रेजों की चूलें हिला देने वाले आजादी के नायक अहमद मुस्तफा खान उर्फ अहमक फफूंदवी को आजादी के जश्न पर लोग याद करना नहीं भूलते। उन्होंने पढ़ाई के दौरान ही गांधी जी द्वारा चलाए गए आंदोलन में हिस्सा लिया और महान क्रांतिकारी कहलाए।

आजादी के 76 वर्ष बीतने के बाद भी उनके नाम पर एक स्मारक भी नहीं बन सका। जिसका उनके परिवार को आज भी मलाल है। फर्रुखाबाद के शमसाबाद में रहने वाले उनके दादा इमाम खान क्रांतिकारी थे और 1857 की क्रांति में भाग लेने के कारण अंग्रेजों ने उन्हें फांसी पर लटका दिया था।

इसके बाद उनके पुत्र अब्दुल्ला खान फफूंद के मोहल्ला महाजनांन में आकर बस गए। 26 अप्रैल 1895 में उनके पुत्र मुस्तफा खान मददाह का जन्म हुआ। बड़े होने पर पिता ने यूनानी चिकित्सा हासिल करने के लिए दिल्ली भेज दिया। वहां आजादी के आंदोलन को देखा, तो यहीं से वह क्रांतिकारी बन गए।

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