हाईकोर्ट ने कहा : तथ्य सुसंगत, तो खारिज नहीं की जा सकती पक्षद्रोही की गवाही

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If the facts are relevant, then the testimony of the traitor cannot be rejected

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा पक्षद्रोही की गवाही अभियोजन या बचाव पक्ष के मामले से सुसंगत है, तो उसे सिरे से खारिज नहीं किया जा सकता। पक्षद्रोही की गवाही को नजरंदाज कर निचली अदालत से सामूहिक बलात्कार के मामले में सश्रम कारावास की सजा भुगत रहे तीन कैदियों को हाईकोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति राजबीर सिंह ने बरेली जेल में बंद चमन, अमित और ओमवीर सिंह की ओर से निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली अपील की सुनवाई करते हुए दिया।

 

 

बरेली जिले के कैंट थाना क्षेत्र की एक विवाहित महिला ने वर्ष 2014 तहरीर दी, आरोप लगाया कि दोपहर लगभग 12 बजे जब वह मोहारी के जंगल में घास कटने गई थी। मौके पर पहुंचे चमन में बंदूक की नोक पर उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर अमित और ओमवीर ने भी दुष्कर्म के बाद उसके झुमके छीन कर भाग गए। वापस घर पहुंचने पर अपनी सास को आपबीती सुनाई, उसके बाद एफआईआर दर्ज करवाई।

पुलिस में मामले की विवेचना के बाद तीनों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और लूट की संगीन धाराओं में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। बरेली की सत्र अदालत में चले विचारण के दौरान अभियोजन की ओर से पेश हुए गवाहों से भिन्न पीड़िता ने प्रति परीक्षा में अपने पूर्व के बयानों के मुकर गई, कहा की गांव वालों के दबाव में उसने तहरीर दी थी। दस्तावेजी साक्ष्यों में पेश चिकित्सा रिपोर्ट में कोई चोट नहीं पाई गई।

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