Bihar: ठगी करने वाली नेटवर्किंग कंपनी के चंगुल से करीब 12 युवक कराए गए मुक्त; कोई 4 तो कोई 5 महीने से था बंधक

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About 12 youths freed from clutches of cheating networking company in Darbhanga; some hostage for 5 months

सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


बिहार के दरभंगा जिले के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के शिवधारा मोहल्ले में नेटवर्किंग कंपनी चला कर ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। इस कंपनी द्वारा बंधक बनाए गए एक युवक के परिवार वाले बंगाल से खोजते-खोजते दरभंगा पहुंचे। तब जाकर उन्हें इस कंपनी के बारे में जानकारी मिली। उसके बाद उन्होंने सबसे पहले डायल 112 पर फोन कर पुलिस की मदद ली। तब जाकर बंधक बने युवक सहित बारह से ज्यादा लोगों को छुड़वाया गया और ठगी करने वाली इस नेटवर्किंग कंपनी का मामला उजागर हुआ।

बंधक रहे युवकों की मानें तो लगभग सैकड़ों युवकों को पश्चिम बंगाल या दूसरे राज्य से बुला कर बंधक बना कर जबरन उनका गलत वीडियो बना लिया जाता था। फिर दूसरे युवको को फोन कर यहां नौकरी के नाम पर बुलाया जाता था। पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बंधक बने युवक के परिजनों ने डायल 112 पुलिस को घटना का ब्यौरा दिया।

विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के आजमनगर में बंद पड़े कल्पना सिनेमा के पीछे एक मकान में नेटवर्किंग कंपनी द्वारा ठगी करने का मामला सामने आया है। उसमें एक बड़े मकान से बंधक बने लगभग बारह युवकों को छुड़ाया गया है। उनमें से ज्यादातर युवक बंगाल या दूसरे राज्य के हैं। एक भी युवक स्थानीय नहीं था।

जानकारी के मुताबिक, बंधक रहे युवकों को बताया गया था कि उन्हें 19 हजार की नौकरी दी जाएगी। इसके एवज में उन्हें कपड़ों की दुकान या गोदाम में काम करना होगा। लेकिन जब युवक यहां आते थे तो उनको काम के बदले दूसरे बेरोजगार युवकों को फोन कर बुलाने को कहा जाता था। उनसे कुछ और काम नहीं लिया जाता था। ऊपर से खाने-पीने के लिए तीन हजार रुपये भी वसूले जाते थे। आखिर इस तरह से युवकों को इकठ्ठा कर किस तरह ये गिरोह काम कर रहा था, इनका क्या मकसद था; यह किसी को नहीं पता।

बंधक रहे युवक शेखुद्दीन ने बताया कि उसे फिरोज नाम के युवक ने बुलाया था। उसने बताया था कि यहां कपड़े की दुकान में काम करना है। इसके एवज आठ हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे। लेकिन जब हम यहां आए तो हमसे 19 हजार रुपये रहने और खाना के नाम पर लिया गया। लेकिन हमसे कपड़े की दुकान की बजाय फोन करके लोगों को बुलाने के लिए कहा जाता था। तीन-चार महीने मुझे यहां आए हो गए, आज तक सैलरी नहीं दी और न ही मुझे घर जाने दिया जा रहा था।

पुलिस अब सभी बंधक युवकों को छुड़ाकर मामले की तफ्तीश में जुट गई है। पुलिस को इन सवालों का जवाब चाहिए कि आखिर इतने युवकों को क्यों बंधक बनाया जाता था। साथ ही इनसे क्या काम लेने वाले थे। अभी और कई ठिकाने पर छापेमारी की जा रही है।

डायल 112 के पुलिसकर्मी सुबोध सिंह ने बताया कि मुझे एक युवक के परिजन ने फोन करके बताया कि शिवधारा इलाके में बहुत बड़ी नेटवर्किंग कंपनी चल रहा है। इसमें मेरे बच्चे को बंधक बना कर रखा गया है। फिर हम लोग यहां आए। काफी युवकों को यहां बंधक बनाकर रखा गया था। फिलहाल सब को मुक्त करा दिया गया है। लेकिन इस नेटवर्किंग कंपनी को संचालित करने वाले गिरोह के सदस्य फरार हो गए हैं।

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