[ad_1]

छड़ी मुबारक का हुआ विसर्जन
– फोटो : संवाद
विस्तार
कश्मीर घाटी की पहलगाम में लिद्दर नदी के किनारे छड़ी मुबारक के पूजन और विसर्जन के साथ अमरनाथ यात्रा संपन्न हो गई। पूजा सुबह 11 बजे शुरू हुई और करीब 90 मिनट तक चली। देश के विभिन्न हिस्सों से आए बड़ी संख्या में साधु और पर्यटक पूजन में शामिल हुए। बाद में भंडारा आयोजित कर उन्हें दक्षिणा दी गई।
महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि जम्मू-कश्मीर राज्य और पूरे देश की शांति और समृद्धि के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। महंत ने कहा कि यात्रा आस्था का प्रतीक है। तीर्थयात्री अपनी आध्यात्मिक प्यास बुझाने के लिए यह तीर्थयात्रा करते हैं। यह न केवल एक आध्यात्मिक यात्रा है, बल्कि भारत की बहुलवादी संस्कृति और विविधता में एकता को भी प्रदर्शित करती है, जिसमें हर साल दुनिया भर से हिंदू इस तीर्थयात्रा के लिए आते हैं और जम्मू-कश्मीर के मुसलमानों ने हमेशा उनका स्वागत किया है।
महंत दीपेंद्र गिरी जी ने कहा कि भारत बहुलवादी समाज का आदर्श उदाहरण है। भारत में धार्मिक समुदायों को अलग-अलग संस्थाओं के रूप में पहचाना जाता है। प्रत्येक समुदाय अपने धर्म, मूल्यों में विश्वास व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं और हम एक को दूसरे के लिए नहीं छोड़ते हैं। हम भारतीय भी बहुलवादी तरीके से धर्म का पालन करते हैं। उदाहरण के लिए मुसलमानों का एक बड़ा अल्पसंख्यक वर्ग विशेष रूप से देश के कुछ क्षेत्रों में दिवाली और होली का त्योहार मनाता है।
समापन समारोह के बाद सभा को संबोधित करते हुए महंत दीपेंद्र गिरि ने भारतीय सेना (7 पैरा), आईटीबीपी जिसने 49 कंपनियां तैनात कीं, जम्मू-कश्मीर पुलिस, एमआरटी, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, पीएचई, पीडीडी, बीआरओ, टेंट आवास प्रदान करने वाले स्थानीय लोगों, पोनी वाले समेत जम्मू कश्मीर के स्थानीय लोगों के साथ-साथ सभी उन एजेंसियों को बधाई दी जो व्यवस्था बनाने के लिए जुड़ी हुई थीं। उन्होंने तीर्थयात्रा के दौरान लंगर, चिकित्सा और अन्य आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के लिए सभी स्वयंसेवी संगठनों द्वारा प्रदान की गई सेवाओं की सराहना की।
[ad_2]
Source link