टूट रहा पहाड़ का सब्र: उत्तराखंड में दर्द दे रहा मानसून, दो महीने में 90 लोगों की मौत, पढ़ें ये खास रिपोर्ट

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नैनीताल : तकरीबन डेढ़ सौ साल से बलियानाला की पहाड़ी दरक रही है। पिछली बारिश में इसी पहाड़ी पर स्थित रईस होटल पूरा ढह गया था। हरिनगर क्षेत्र में रहने वाले 55 परिवारों को हर बारिश में अन्यत्र शिफ्ट होने के नोटिस जारी होते हैं। इसके उपचार के लिए 620 करोड़ की जायका योजना कारगर साबित नहीं हुई। खूपी गांव के लिए पाइंस नाला खतरे का सबब बना हुआ है।  

चंपावत : आपदा के दौरान मां पूर्णागिरि धाम में दुकानें बंद रहीं। चार जुलाई से 17 दिनों तक भारी मलबा आने से टनकपुर ककरालीगेट-ठुलीगाड़ सड़क बंद रही। 300 से अधिक श्रद्धालुओं को तीन दिन में निकाला जा सका। टनकपुर-जौलजीबी सड़क पर काम के दौरान जेसीबी ऑपरेटर की मौत हुई, 30 मकानों को नुकसान हुआ।

पिथौरागढ़ : सीमांत जिले में इस बार बारिश का रौद्र रूप देखने को नहीं मिला। हालांकि अलग-अलग घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई। भूस्खलन से जिले में कुल 168 मकान क्षतिग्रस्त हुए। आपदा ने सबसे अधिक नुकसान सड़कों को पहुंचाया। नौ ग्रामीण सड़कें अब भी बंद हैं।  लिपुलेख सड़क बार-बार बंद होने से सीमा पर तैनात जवानों को दिक्कतें हो रही हैं।  

अल्मोड़ा : बारिश से अल्मोड़ा जिले में अब तक एक मकान पूर्णत: और 65 मकान आंशिक क्षतिग्रस्त हुए हैं। 18 मकानों को ज्यादा नुकसान हुआ है। बारिश से कहीं सड़क की सुरक्षा दीवार क्षतिग्रस्त हुई है तो, कहीं पैरापिट को नुकसान पहुंचा है। मलबा आने से जिले में सुनाड़ी-मल्ला बिनौला, बाजखेत-कनकोट-तालबुधानी ग्रामीण मोटर मार्ग यातायात के लिए अभी बंद है।

बागेश्वर : आपदा काल में अब तक दो लोगों की मौत हुई है। दोनों मामले कपकोट तहसील क्षेत्र के हैं। एक व्यक्ति की मौत पहाड़ी से गिरे बोल्डर की चपेट में आने से हुई तो एक व्यक्ति की जान बिजली गिरने से गई। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार अब तक 298 पशुओं की मौत हुई। 30 मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त, 33 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं।

ऊधमसिंह नगर : जिले के काशीपुर शहर में लगभग 15-20 वर्ष बाद बाढ़ और शहर में भारी जलभराव की समस्या खड़ी हुई है। ढेला में पांच मकान और एक झोपड़ी समा गए। 6 मकानों में दरारें आ गई। बाढ़ से 409 लोग प्रभावित हुए। एक मासूम सहित चार लोगों की डूबने से मौत हो गई। रुद्रपुर में कल्याणी नदी का जलस्तर बढ़ने से लोग परेशान रहे। 

चमोली : जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया कि चमोली जनपद में अप्रैल से अभी तक आठ लोगों की अकाल मौत हुई है। विभिन्न विभागों की 79.42 करोड़ की परिसंपत्तियों की क्षति जबकि 23.706 हेक्टेयर कृषि क्षति का आकलन है। आपदा न्यूनीकरण के तहत 8 प्रस्तावों को 52.30 लाख तथा क्षतिग्रस्त पांच पुलों के लिए 35.22 लाख धनराशि स्वीकृत की गई है। औली को जोड़ने वाला वैकल्पिक मार्ग पर दरारें पड़ गई हैं। 

उत्तरकाशी : 15 जून से अब तक प्राकृतिक आपदा, वाहन हादसे में 15 लोगों की मौत हुई है। गंगोत्री हाईवे पर गंगनानी के पास हुए भूस्खलन में चार लोग जिंदा दफन हो गए थे। इस बार गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे को भारी नुकसान पहुंचा है। कई पुश्तों-पुलियों को क्षति पहुंची है। भूस्खलन क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर नुकसान हुआ है।

रुद्रप्रयाग : केदारनाथ के बायीं और दायीं दोनों तरफ भूस्खलन जोन सक्रिय है। रामबाड़ा से गरुड़चट्टी तक मंदाकिनी नदी के दोनों ओर भूकटाव हो रहा है। गौरीकुंड से सोनप्रयाग तक हालात बेहद नाजुक हैं। जुलाई में केदारघाटी के रेल गांव में बादल फटने से व्यापक नुकसान हुआ। बीते 3 अगस्त को गौरीकुंड में भूस्खलन से तीन अस्थायी दुकानें बह गईं थीं। इसमें 23 लोग लापता हो गए थे। 10 शव बरामद हो चुके हैं। 13 लोग लापता हैं। दो दिन बाद गौरी गांव में भूस्खलन की चपेट में दो आने से मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। 10 अगस्त को रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राजमार्ग पर फाटा के समीप पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटने से एक वाहन दब गया था, जिसमें सवार पांच लोगों की मौत हो गई थी।

टिहरी : तेज बारिश से हुए भूधंसाव के कारण जिले में कई गांव खतरे की जद में आ गए। दस साल में अभी तक 16 गांवों के 455 परिवारों का पुनर्वास किया गया। उनके घर खतरे में आने पर उन्हें सुरक्षित जगह घर बनाने के लिए 4.25 लाख रुपये प्रतिपरिवार की दर से 19 करोड़ 28 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। अभी 12 गांव खतरे की जद में है, जिनका भूगर्भीय सर्वे होना बाकी है। आपदा में वर्ष 2017 से अभी तक 59 लोगों ने अपनी जान गंवाई है।

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