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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : सोशल मीडिया
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कानपुर के साढ़ थाना क्षेत्र में किशोरी से छेड़छाड़ के बाद थाने में बुलाकर पूछताछ करने और जांच के नाम पर बेइज्जत करने के मामले में भले ही पुलिस अधिकारियों ने अपनी साख बचाने के लिए थ्योरी गढ़ दी हो, लेकिन नाबालिग को थाने बुलाकर उसके बयान दर्ज करना कानून गुनाह है। किशोर न्याय अधिनियम भी यही कहता है। अधिनियम का उल्लंघन होने के बाद भी अधिकारियों ने इस पर पूरी तरह से पर्दा डाल दिया।
थाना क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले मजदूर की 16 साल की बेटी को गांव में रहने वाले पूर्व प्रधान का भतीजा राह चलते छेड़छाड़ करता था। तीन सितंबर को पिता ने साढ़ थाने में आरोपी के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने उसके खिलाफ छेड़खानी, पॉक्सो एक्ट और हत्या करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर पहले उसे गिरफ्तार किया, लेकिन सात साल से कम की सजा वाली धाराओं को आधार बनाकर उसे निजी मुचलके पर छोड़ दिया।
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