[ad_1]

What Is Hello UPI ? डिजिटल पेमेंट की दुनिया में भारत का यूपीआइ पूरी दुनिया में डंका बजा रहा है. अब नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआइ) ने उसमें एक नया फीचर जोड़ दिया है और यूपीआइ के जरिये वॉयस मोड पेमेंट की सुविधा दी है.

‘हेलो यूपीआइ’ बोल कर आसानी से करें यूपीआइ से पेमेंट
इस नये फीचर के तहत अब मोबाइल पर ‘हेलो यूपीआइ’ बोल कर आसानी से यूपीआइ से पेमेंट किया जा सकता है. इस नयी सुविधा ‘हेलो यूपीआइ’ को आरबीआइ के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में लॉन्च किया है.

यूपीआइ पेमेंट करने में मदद
फिलहाल इस सुविधा को हिंदी और अंग्रेजी में पेश किया गया है. जल्द ही इसे अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में पेश किया जाएगा. एनपीसीआइ ने बताया कि यह सुविधा उपभोक्ताओं को यूपीआइ ऐप्स, टेलीफोन कॉल और इंटरनेट ऑफ थिंग्स डिवाइस के जरिये आवाज द्वारा यूपीआइ पेमेंट करने में मदद करेगा.

स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं
इस नये फीचर के इस्तेमाल के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अपने फीचर फोन के माध्यम से इन सुविधाओं तक पहुंच सकते हैं. इस सुविधा से वाॅयस मोड से भुगतान करने के लिए फिलहाल 100 रुपये की सीमा रखी गई है.

दो तरीकों से मिलेगी सुविधा
यह सुविधा दो तरीके से उपलब्ध होगी – ऑनकॉल और इन-ऐप. ऑन-कॉल सुविधा यूजर्स को एक नंबर डायल करने की अनुमति देगा, जहां भुगतान पूरा करने के लिए आइवीआर के माध्यम से मार्गदर्शन किया जाएगा. इन-ऐप से किसी भी यूपीआइ ऐप पर अपने वॉयस इनपुट का उपयोग करने की अनुमति देगी.

बीओबी के 6000 एटीएम पर यूपीआइ सुविधा शुरू
बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) ने देशभर में अपने 6000 एटीएम पर यूपीआइ एटीएम सुविधा शुरू कर दी है. बैंक ने शुक्रवार को बताया कि एनपीसीआइ के समन्वय से यूपीआइ एटीएम शुरू करने वाला देश का वह पहला सरकारी बैंक है.

डिजिटल भुगतान को लोगों तक पहुंचाना लक्ष्य
नयी सुविधा से यूपीआइ भुगतान और भी सरल हो गई है. इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को डिजिटल पेमेंट से जोड़ना है. इसका उद्देश्य उन लाखों लोगों को डिजिटल भुगतान के दायरे में लाना है, जो स्मार्टफोन, इंटरनेट कनेक्टिविटी और सीमित डिजिटल साक्षरता की कमी से इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. समाधान का उद्देश्य भारत में निचले स्तर पर मौजूद 11.4 करोड़ परिवारों डिजिटल भुगतान से जोड़ना. ये लोग बड़े पैमाने पर ग्रामीण या उप-शहरी क्षेत्रों में रहते हैं.
[ad_2]
Source link