हाईकोर्ट : फर्जी मदरसों के खिलाफ एसआईटी की रिपोर्ट रद्द करने से हाईकोर्ट का इन्कार

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High Court refuses to cancel SIT report against fake madrassas

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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आजमगढ़ के फर्जी मदरसा संचालकों की मुसीबत बढ़ने वाली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनके खिलाफ शासन को सौंपी गई एसआईटी की रिपोर्ट को रद्द करने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर लगाई गई रोक को भी हटाने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति शैलेंद्र क्षितिज ने आजमगढ़ के मदरसा अंजुमन सिद्दीकिया जामिया नुरुल उलूम और एक अन्य की प्रबंध समिति की ओर से एसआईटी रिपोर्ट को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

आजमगढ़ में लगातार फर्जी मदरसों के संचालन के खिलाफ शिकायतें सरकार को मिल रही थीं। आरोप लगाया जा रहा था कि सरकारी अनुदान पाने के लिए सैकड़ों मदरसे कागज पर चल रहे हैं। वर्ष 2017 में सरकार ने शिकायतों की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। एसआईटी ने खुलासा किया था कि आजमगढ़ में 313 में से 219 मदरसे केवल कागजों पर संचालित हो रहे हैं। इनमें से 39 को आधुनिकीकरण के नाम पर तो सरकारी भुगतान भी किया जा चुका है।

एसआईटी ने 30 नवंबर 2022 को अपनी रिपोर्ट यूपी सरकार के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति के समक्ष पेश की थी। जांच रिपोर्ट में फर्जी मदरसा संचालकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने की संस्तुति की गई है। साथ ही तत्कालीन जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और रजिस्ट्रार को भी दोषी ठहराया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कई मदरसा संचालकों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करवाने की कार्रवाई भी प्रस्तावित है।

एसआईटी की जांच रिपोर्ट को मदरसा संचालकों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। कहा कि जांच के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया। एकतरफा जांच रिपोर्ट के आधार पर मदरसा संचालकों के खिलाफ कार्रवाई किया जाना प्राकृतिक न्याय सिद्धांत के विरुद्ध है। कोर्ट ने दलील मानने से इनकार कर याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने याचियों को दी गई अंतरिम राहत के रूप में जांच रिपोर्ट के क्रियान्वयन पर लगाई गई रोक को भी हटाने का आदेश पारित किया है।

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