आईसीसी क्रिकेट विश्वकप: धर्मशाला में तेज गेंदबाजों के साथ ही स्पिनरों का भी रहेगा दबदबा

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ICC Cricket World Cup: The magic of wrist bowlers will work on the pitches of Dharamshala Stadium.

(रिस्ट स्पिनर
– फोटो : संवाद

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तेज गेंदबाजों के लिए मददगार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम धर्मशाला की पिचों पर विश्वकप में धीमी गति के कलाई गेंदबाजों (रिस्ट स्पिनर) का भी जादू चलेगा। धर्मशाला की पिचों पर तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल मिलता है। इससे तेज गेंदबाज विपक्षी टीम को काफी हद तक परेशान करते हुए विकेट हासिल करते हैं। साथ ही कलाई गेंदबाज अगर स्टीक लाइन पर गेंदबाजी करेंगे तो वे इस अतिरिक्त उछाल से दूसरी टीम के बल्लेबाजों को पूरी तरह धराशायी कर सकते हैं। धर्मशाला में भारत के अलावा सात विदेशी टीमें विश्वकप के मैच खेलेंगी।

एक या दो टीमों को छोड़ सभी के पास बेहतर कलाई गेंदबाज शामिल हैं। जो अपनी गेंदबाजी से मैच का रुख बदल सकते हैं। 25 मार्च 2017 में भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टेस्ट मैच में भारत के कलाई गेंदबाज चाइनामैन कुलदीप यादव ने चार विकेट हासिल कर ऑस्ट्रेलिया खेमे को चारों खाने चित किया था। इस बार विश्वकप में भी वे भारतीय टीम में शामिल हैं। अफगानिस्तान टीम के स्टार गेंदबाज राशिद खान, दक्षिण अफ्रीका के तबरेज शमशी, ऑस्ट्रेलिया के एडम जंपा, इंग्लैंड के आदिल राशिद और न्यूजीलैंड टीम के ईश सोढ़ी भी धर्मशाला की पिच पर करिश्मा दिखाने के लिए आएंगे।

कई बड़े मौकों पर अपनी टीमों को इन खिलाड़ियों ने तेज पिचों पर अपनी गेंदबाजी से जीत दिलवाई है। एचपीसीए के मुख्य पिच क्यूरेटर सुनील चौहान ने बताया कि तेज पिचें केवल तेज गेंदबाजों को ही मदद नहीं करती हैं। यहां पर स्पिनर भी अपनी तकनीक से फायदा उठा सकते हैं। तेज पिचों पर गेंदबाजों को अच्छा उछाल मिला है। अगर स्पिन गेंदबाज अच्छी लाइन और लैंथ में गेंदबाजी करे तो पिच के उछाल का फायदा लेकर विकेट हासिल कर सकता है।

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