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नाव हादसे में दो चचेरी बहनों की मौत
– फोटो : अमर उजाला
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मुजफ्फरपुर में हुए नाव हादसे में 10 वीं की छात्रा सुस्मिता और नौवीं में पढ़ने वाली उसकी चचेरी बहन राधा के डूबने के बाद उनके परिजनों में चीख-पुकार मची है। राधा और सुस्मिता का दारोगा बनने का सपना था। दोनों बहन आपस में काफी घुल-मिलकर रहती थी। बेटी और भतीजी के डूबने की सूचना पर घरवाले मौके पर पहुंचे।
जानकारी के मुताबिक सुष्मिता के नही मिलने पर उसकी मां ने नदी में छलांग लगा दी। हालांकि उसे किसी तरह गोताखोरों ने बाहर निकाल लिया। परिजनों का कहना था कि कम संसाधन में भी दोनों बहने पढ़ने में काफी मेघावी थी। दोनों हमेशा कहा करती थी कि देखना मेरे बदन पर एक ना एक दिन वर्दी जरूर चढ़ेगी। लेकिन गुरुवार को दोनों नाव हादसे का शिकार हो गयी।
नदी किनारे चीत्कार मारकर कोई सास तो कोई ससुर की कर रही थी तलाश
राशन लाने के लिए घर से निकली सास गीता देवी की डूबने की खबर मिलने के बाद उसकी बहू शकुंती देवी घर से भागते- भागते मधुरपट्टी घाट पर पहुंची। यहां नदी किनारे बैठकर चीत्कार मार रही थी। गीता देवी घर से राशन लेने के लिए भागवतपुरा जा रही थी। इधर, शिवजी चौपाल की भी बहू खुशबू नदी किनारे बैठकर दहाड़ मारकर रो रही थी। वह भी राशन लाने के लिए ही घर से निकला था।
हेलो, माई घर से राशन लेवे के लेल नहीं न निकलो ह, चेक करके बतावा
हेलो हेलो माई घर से राशन लेवे के लेल नहीं न लेकलो ह चेक कके बता। हम अभी मधुरपट्टी घाट पर हती। यहां भटगामा घाट पर नाव पलट गेलई ह। बहुते लोग डूब गेलई ह। जल्दी चेक कके बतावा कि मई घर ही है ना। यह कहना था नाव पलटने की सूचना पर घाट पर पहुंचे मधुरपट्टी गांव के राहुल कुमार का। वह अपने घर पर मोबाइल से फोन से पत्नी से पूछा कि माई घर पर है ना। जब उधर से उसकी पत्नी ने कहा कि हां, तब उसकी जान में जान आयी।
बूढ़ी मां व तीन बच्चों का अब कौन करेगा भरण-पोषण
शमशूल कान से थोड़ा ऊंचा सुनता था। वह मजदूरी करके अपनी बुजुर्ग मां व तीन छोटे- छोटे बच्चे का गुजारा करता था। घर में कुछ खाने को नहीं था। राशन बंटाने की सूचना पर वह घर से झोला लेकर निकला। जब नाव पलटी तो उसमें शमशूल भी डूब गया। परिजनों में घटना के बाद से चीख- पुकार मची हुई है। एक दिव्यांग बुजुर्ग मां व तीन छोटे- छोटे बच्चें को कौन खाना देगा। इसकी चिंता लोगों को सता रही है।
या अल्लाह, हमर साजदा भी डूब गयी, कोई ता ढूंढ़ के ला दा
या अल्लाह, हमर साजदा भी डूब गयी है, कोई त ढूंढ़ के ला दा हो भाई सव। अब हम केकरा सहारे जीवई। हमर बच्ची की जगह पर हम काहे न डूब गइली। सजदा की डूबने की खबर के बाद उसकी मां बदहवाश हो गयी थी। वह नदी के घाट पर पहुंच कर लोगों से अपनी बेटी को खोज कर लोने की गुहार लगा रही थी। 11 वर्षीय साजदा भी अपने घर के लिए राशन लेने के लिए ही निकली थी। लेकिन, नाव हादसे का शिकार हो गयी।
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