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जीएमसी जम्मू
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जीएमसी जम्मू में शुरू होने जा रही अत्याधुनिक एमआरआई (मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग) मशीन से मरीजों को लंबे इंतजार से निजात मिलने की उम्मीद है। इसके साथ अब दो एमआरआई मशीनें हो जाएंगी और रोजाना 60 से अधिक एमआरआई होंगी। अभी संभाग स्तर पर एकमात्र मशीन होने के कारण स्थानीय के अलावा जिला स्तर के मरीजों का लोड है। जीएमसी में नई अल्ट्रासाउंड सेक्शन को भी शुरू किया जा रहा है, जिससे इमरजेंसी में दो-दो अल्ट्रासाउंड एक ही छत के नीचे चलेंगे।
रेडियोलॉजी विभाग में 1999 में एमआरआई मशीन स्थापित की थी, जिसे 2012 में अपग्रेड किया गया। मशीन को सुबह दस से रात दस बजे तक चलाया जाता है और औसतन 30 से 32 एमआरआई की जा रही हैं, जबकि संभाग स्तर से एमआरआई के लिए मरीजों का लोड कई गुणा अधिक है। इस कारण सामान्य एमआरआई के लिए छह-छह माह की तिथि मिलती थी।
पुरानी मशीन की क्षमता 150 टेस्ला है, जबकि नई मशीन की 300 है और यह बेहतर नतीजे देती है। करीब 15 करोड़ से तुर्की से यह मशीन लाई गई है, जिसका पिछले कुछ दिन से ट्रायल रन किया जा रहा है। मशीन में कैमरा लगाने के बाद इसे मरीजों को औपचारिक तौर पर समर्पित कर दिया जाएगा।
इमरजेंसी के साथ नया अल्ट्रासाउंड सेक्शन बना
मौजूदा समय में रेडियोलॉजी विभाग में दो, एक ओपीडी और इमरजेंसी में दो अल्ट्रासाउंड चल रहे हैं, लेकिन इमरजेंसी में एक अल्ट्रासाउंड कैंसर विभाग के परिसर में है और बारिश के दौरान वहां जलभराव की समस्या रहती है। अब इमरजेंसी के साथ नए अल्ट्रासाउंड सेक्शन को बनाया है, जिससे चौबीस घंटे अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिलेगी। इमरजेंसी में चौबीस घंटे में 200 से 300 अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं जबकि सुबह 10 से शाम चार बजे तक 50 के करीब अल्ट्रासाउंड किए जाते हैं। नए अल्ट्रासाउंड केबिन में तीन कमरे तैयार किए हैं।
नए अल्ट्रासाउंड सेक्शन और नई एमआरआई को शुरू करने के लिए फाइनल टच दिया जा रहा है। एमआरआई को ट्रायल रन पर चलाया जा रहा है और अगले एक या दो हफ्ते में शुरू करने की योजना है। इससे मरीजों को राहत मिलेगी। जीएमसी में एक समय में दो एमआरआई मशीनें काम करेंगी। -डॉ. आशुतोष गुप्ता, प्रिंसिपल।
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