दिल्ली : जेएनयू में लगातार कम हो रही है छात्राओं की संख्या, विवि के कामकाज और नीति निर्धारण पर उठे कई सवाल

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The number of girl students is continuously decreasing in JNU.

जेएनयू : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय,नई दिल्ली
– फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

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जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पिछले सालों में छात्राओं की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। एक और देश में बेटियों को शिक्षा से जोड़ने का काम चल रहा है जबकि जेएनयू में छात्रों की तुलना में छात्राओं की संख्या घट रही है।  

यह खुलासा जेएनयू शिक्षक संघ ने अपनी रिपोर्ट में किया है। उनका कहना है कि शोध छात्रों का अनुपात वर्ष 2016-17 में 62.2 फीसदी था, जोकि वर्ष 2021-22 में 46 फीसदी रह गया है। जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन की वार्षिक रिपोर्ट के आधार पर विवि के कामकाज और नीति निर्धारण पर सवाल उठाए  हैं। 

जेएनयू शिक्षक संघ की सदस्य प्रो. आयशा किदवई ने कहना था कि  एनटीए द्वारा प्रौद्योगिकी-संचालित प्रवेश परीक्षा को अपनाने के लिए विश्वविद्यालय की अपनी प्रवेश परीक्षाओं को बंद करने और अनुसंधान कार्यक्रमों में प्रवेश में वंचित अंक प्रणाली को खत्म करने से छात्रों की संरचना प्रभावित हुई है। वहीं, संघ की पूर्व सचिव प्रोफेसर मौसमी बसु ने कहा कि जेएनयू शोध पाठ्यक्रमों के लिए जुलाई से पहले प्रवेश परीक्षा आयोजित कर लेता था। जबकि एनटीए के कार्यभार संभालने के बाद अकादमिक कलेंडर गड़बड़ा गया है। 

प्रो. बसु का यह भी आरोप है कि दाखिला प्रवेश परीक्षा के लिए केंद्रों की संख्या भी कम कर दी गई है। इसके कारण महिला उम्मीदवार दूर के केंद्रों में जाकर परीक्षा नहीं दे पाती है। अन्य शिक्षकों का आरोप है कि बार-बार नीतिगत बदलावों के कारण  विश्वविद्यालय के हालात खराब हो रहे हैं। वर्ष 2019 से, जेएनयू ने प्रवेश परीक्षाओं को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को आउटसोर्स कर दिया है, जो अब केवल एमसीक्यू के साथ कंप्यूटर-आधारित प्रशिक्षण आयोजित करती है। 

जबकि  2017 में जेएनयू ने शोध छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नवीनतम प्रवेश नियमों को अपनाया। इसमें जेएनयू ने अपनी वंचित अंक नीति को समाप्त कर दिया, जिसमें  प्रवेश के दौरान पिछड़े जिलों के छात्र और छात्राओं को अतिरिक्त अंक दिए जाते थे। इसके अलावा नए नियमों ने उन शोध छात्रों की संख्या को भी सीमित कर दिया, जिनकी देखरेख एक संकाय सदस्य कर सकता था। इससे शोध सीटों में कटौती हुई।

कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा भी कारण 

कई शिक्षकों का मानना है कि एनटीए की कंप्यूटर आधारित प्रवेश परीक्षा भी छात्राओं की संख्या कम होने का बड़ा कारण है। क्योंकि जेएनयू में बेहद पिछड़े व गरीब परिवारों की छात्राएं आती हैं। गरीब परिवारों और पिछड़े क्षेत्रों के छात्राओं को कंप्यूटर के साथ उनकी अनुभवहीनता और कोचिंग का खर्च उठाने में असमर्थता के कारण भी वे दाखिले से वंचित रह रही हैं।

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