Delhi liquor policy case: मनीष सिसोदिया का सीबीआई चार्जशीट में नाम, क्या है इसका कानूनी मतलब?

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सीबीआई ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार 25 अप्रैल को दाखिल शराब घोटाले की चार्जशीट में पहली बार उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का नाम आरोपियों के रूप में शामिल कर लिया है। यह आम आदमी पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। अरविंद केजरीवाल अब तक यही कहते रहे थे कि सिसोदिया के खिलाफ जांच एजेंसी को कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं और उन पर की जा रही कार्रवाई राजनीतिक साजिश का परिणाम है। लेकिन चार्जशीट में सिसोदिया का नाम शामिल होने के बाद उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया है कि सिसोदिया शराब घोटाले के मास्टरमाइंड हैं। पार्टी ने ‘आप’ से मांग की है कि अब उन्हें सिसोदिया को पार्टी से निकाल देना चाहिए।

शराब घोटाले में कथित साउथ ग्रुप के जरिए सौ करोड़ रुपये की अवैध लेनदेन की गई थी। सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध लेनदेन में आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं के नाम सामने आए हैं। शराब नीति को बनाते हुए भी जिस प्रकार से व्यापारियों की कमीशन को आश्चर्यजनक तरीके से बढ़ाया गया, उसे लेकर भी प्रश्न खड़े किए गए हैं। इस मामले में पैसों की लेनदेन की ट्रेल सबसे मजबूत साक्ष्य बनकर उभरी है।    

चार्जशीट में नाम आने का अर्थ

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने अमर उजाला को बताया कि किसी मामले को दर्ज करने के दौरान अपराध से जुड़े आरोपियों पर कुछ आरोप लगाए जाते हैं। जब जांच एजेंसी को उक्त अपराध से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य मिल जाते हैं तब वह अदालत के सामने पेश अपनी चार्जशीट में आरोपी का नाम शामिल करती है। इसका अर्थ है कि जांच एजेंसी यह मानती है कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोपों को सिद्ध करने के लिए उसके पास पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं। अदालत में उसे इन आरोपों को साबित करना पड़ता है।

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अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे ने कहा कि यदि अदालत जांच एजेंसी के द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों को आरोपों के अनुरूप पर्याप्त और विश्वसनीय पाती है, तो आरोपी की अपराध में भूमिका को देखते हुए उक्त मामले में कानून में निर्धारित सजा के अनुसार सजा देती है। आरोप सिद्ध न हो पाने की स्थिति में आरोपी को दोषमुक्त करार दे दिया जाता है।     

क्या अरविंद केजरीवाल पर भी कसेगा फंदा?

भाजपा यह आरोप लगाती रही है कि इस मामले के असली मास्टरमाइंड अरविंद केजरीवाल हैं। आम आदमी पार्टी के दूसरे नेता केवल उनके आदेशों का पालन करने का ही काम किया करते थे। ऐसे में यदि मामला ज्यादा गंभीर होता है, तो अरविंद केजरीवाल की भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि, सीबीआई अरविंद केजरीवाल से पहले ही लगभग दस घंटे की पूछताछ कर चुकी है, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

भाजपा ने लगाया ये आरोप

दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल यह कहते रहे हैं कि सीबीआई को मनीष सिसोदिया के खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिले हैं। लेकिन अब सीबीआई ने सबूतों के आधार पर उनका नाम अपनी चार्जशीट में शामिल कर लिया है। यह साबित करता है कि शराब घोटाले में मनीष सिसोदिया की भूमिका थी। उन्होंने कहा कि अब सिसोदिया का नाम चार्जशीट में आने के बाद केजरीवाल को राजनीतिक ईमानदारी दिखाते हुए पार्टी से निष्कासित कर देना चाहिए।   

वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा कि मनीष सिसोदिया का नाम आज शराब घोटाले की चार्जशीट में आने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के सभी नेता जनता के प्रति जवाबदेह हैं। वे अब दिल्ली की जनता को बताएं कि क्या वे अब भी वह मनीष सिसोदिया को निर्दोष मानते हैं? उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी नेता मनीष सिसोदिया को दोषी मानें, या ना मानें, दिल्ली की जनता सिसोदिया को शराब घोटाले का मास्टरमाइंड मानती है।

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