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मौसमी परिस्थितियों में बदलाव के चलते बुधवार को न्यूनतम पारा सामान्य से तीन लुढ़ककर सीजन का सबसे कम आठ डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इससे पहले सोमवार को न्यूनतम तापमान 8.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में पारा और गिरेगा। साथ ही सुबह में धुंध छाई रहेगी।
मौसम विभाग के मुताबिक, बीते 24 घंटे में अधिकतम तापमान सामान्य से एक अधिक 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में नमी का स्तर 29 से 90 फीसदी रहा। सुबह कुछ जगहों पर धुंध छाई रही व दिन में धूप निकली रही। धूप ढलने के बाद शाम को सर्दी का अहसास बढ़ गया था।
इधर, मौसमी परिस्थितियां अनुकूल होने से एनसीआर की हवा में सुधार जारी है। फरीदाबाद, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और नोएडा की हवा औसत श्रेणी में दर्ज की गई है। वहीं, दिल्ली की हवा 237 औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) के साथ सबसे खराब दर्ज की गई। वायु मानक एजेंसियों का पूर्वानुमान है कि अगले 24 घंटे में वायु गुणवत्ता में खास बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, 25 नवंबर के बाद से मौसमी परिस्थितियों में बदलाव की वजह से और खराब होगी।
मिक्सिंग हाइट व वेंटिलेशनइंडेक्स कम होने की संभावना
भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक, बीते 24 घंटे में मिक्सिंग हाइट का स्तर 1200 मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स 7500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड रहा। हवा की रफ्तार 12 से 16 किलोमीटर प्रतिघंटा दर्ज की गई। विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले दो दिनों में मिक्सिंग हाइट और वेंटिलेशन इंडेक्स दोनों ही कारकों में कमी आएगी। अगले 24 घंटे में मिक्सिंग हाइट एक हजार मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स 5700 वर्ग मीटर प्रति सेकंड और हवा की दिशा पश्चिम- उत्तर-पश्चिम व रफ्तार 12 किलोमीटर प्रतिघंटा रह सकती है।
वहीं, इसके अगले दिन हवा की दिशा उत्तर-पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम रहने के साथ रफ्तार घटकर चार से छह किलोमीटर प्रतिघंटा और मिक्सिंग हाइट 850 मीटर व वेंटिलेशन इंडेक्स 1500 वर्ग मीटर प्रति सेकेंड तक दर्ज किए जाने की संभावना है।
प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी 3%
केंद्र की वायु मानक संस्था सफर इंडिया के मुताबिक, बीते 24 घंटे में दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी तीन फीसदी रही। वहीं, पीएम 2.5 से छोटे कणों की पीएम 10 में 52 फीसदी हिस्सेदारी दर्ज की गई है। पीएम 10 का स्तर 167 व पीएम 2.5 का स्तर 88 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर दर्ज किया गया। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मुताबिक, उत्तर भारत में पंजाब में सबसे अधिक 140 जगहों पर पराली जलने की घटनाएं रिकॉर्ड की गईं। वहीं, हरियाणा में 27, उत्तरप्रदेश में 73, मध्यप्रदेश में 259 और राजस्थान में 10 जगहों पर पराली जली है।
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