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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू
– फोटो : संवाद
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी तो सरकारी खजाना खाली था। दिनचर्या का खर्च निकालने के पैसे भी उनके पास नहीं थे। भाजपा ने बुरे तरीके से धन का दुरुपयोग किया था। इसके बाद प्रदेश में आपदा आई। विपक्ष के नेताओं ने आपदा के समय सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेंकी हैं। जब साथ देने का समय आया तो वह मूकदर्शक बने रहे। कांग्रेस के सभी मंत्री और विधायक स्वयं मैदान में उतर गए। केंद्र सरकार से भी आपदा के लिए जो प्रदेश का हक बनता है, वह मांगा गया, लेकिन नहीं मिला। प्रदेश भाजपा नेताओं ने इसमें भी साथ नहीं दिया। उन्होंने कि आने वाले समय में प्रदेश को अपने पैरों पर खड़ा होना है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था को सही करना है। इसके लिए सभी के प्रयास आवश्यक हैं। 90 प्रतिशत आबादी गांव में रहती है, इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवस्था सही करना आवश्यक है। सुक्खू ने कहा कि बेहतर शिक्षा प्रदेश में अच्छे स्वास्थ्य की नींव रखेगी। प्रदेश सरकार हर विधानसभा क्षेत्र में डे बोर्डिंग स्कूल खोल रही है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि चार साल में प्रदेश कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाएंगे और और दस साल में देश का सबसे समृद्ध और अमीर राज्य बनाएंगे। आपदा राहत कार्यक्रम में बुधवार को बिलासपुर पहुंचे मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े-बड़े शिक्षण और स्वास्थ्य संस्थानों को खोलने का कोई महत्व नहीं है, यदि वहां पर सुविधाएं बेहतर न हों। पूरे देश में हिमाचल कैंसर के मामलों में दूसरे स्थान पर है। यह चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री ने बताया कि वह सीवरेज लाइन की सौगात देने के लिए फिर से बिलासपुर आएंगे।
ओपीएस कर्मचारियों के लिए आत्म सम्मान
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं एक कर्मचारी के बेटे हैं। इसलिए ओपीएस का महत्व जानते हैं। ओपीएस मिलने से कर्मचारियों ने राहत की सांस ली हैं। कांगड़ा में जब वह एक ओपीएस लाभार्थी महिला से वह मिले तो उसने बताया कि पहले उसे चार हजार रुपये मिलते थे और अब 40,000 मिलते हैं। इसमें से दस हजार उसने राहत कोष के लिए दान किए। ओपीएस कर्मचारियों के आत्म सम्मान की बात है।
प्रदेश के संसाधनों का प्रदेशवासियों को नहीं मिला लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में बहुत अधिक मात्रा में संसाधन उपलब्ध हैं, लेकिन उनका लाभ प्रदेश के लोगों को नहीं मिला है। इन संसाधनों को दूसरों पर लुटाया गया। पानी एक बहुत बड़ा संसाधन हमारे पास है, इस पर कभी निवेश नहीं किया गया। इतनी परियोजनाएं प्रदेश में शुरू हुईं, लेकिन लोगों को रोजगार नहीं मिला। इन परियोजनाओं से करोड़ों का लाभ मिलता है, लेकिन प्रदेश के लोगों को कुछ नहीं मिलता। इस पर पहला अधिकार हिमाचलियों का है, इसलिए उनके नियमों पर कार्य करना होगा। एसजेवीएन को इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। बीबीएमबी से भी 12 प्रतिशत की रायल्टी हम चाहते हैं। बीबीएमबी के पानी में बिलासपुर पूरा डूब गया, जमीनें चली गईं, लेकिन कुछ नहीं मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाखड़ा विस्थापितों के मामले पर भी सरकार सोच विचार कर रही है।
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