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आज हम आपको इस साल की बड़ी चुनावी हलचल की जानकारी देंगे। ये बताएंगे कि चुनावी नतीजों ने किस दल को मजबूत बनाया और किसे कमजोर किया? आइए जानते हैं…
राष्ट्रपति चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी की अगुआई वाली एनडीए ने ओडिशा के आदिवासी क्षेत्र से आने वाली द्रौपदी मुर्मू को प्रत्याशी बनाया था। मुर्मू के खिलाफ विपक्ष ने यशवंत सिन्हा को खड़ा किया। 18 जुलाई को चुनाव हुए, जिसमें द्रौपदी मुर्मू को 64.03% वोट मिले, जबकि विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को 35.97% मतों से ही संतोष करना पड़ा। इस तरह से देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में द्रौपदी मुर्मू मिलीं। मुर्मू देश की दूसरी महिला राष्ट्रपति भी हैं।
उपराष्ट्रपति चुनाव की बात करें तो भाजपा की अगुआई वाले एनडीए ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को उम्मीदवार बनाया, जबकि विपक्ष की तरफ से कांग्रेस की दिग्गज नेता रहीं मार्गरेट अल्वा को मैदान में उतारा गया। छह अगस्त को हुए चुनाव में जगदीप धनखड़ ने रिकॉर्ड 74.37% मतों के साथ जीत हासिल कर ली। विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को केवल 25.63% वोट मिले।
विधानसभा चुनावों में कहां क्या हुआ?
इस साल सात राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात शामिल है। इनमें से पांच राज्यों में भारतीय जनता पार्टी ने दोबारा सरकार बना ली, जबकि एक राज्य में आम आदमी पार्टी और एक में कांग्रेस को जीत मिली।
1. उत्तर प्रदेश: यहां लगातार दूसरी बार भाजपा को जीत मिली। भाजपा ने निषाद पार्टी और अपना दल (सोनेलाल) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। भाजपा की अगुआई वाली एनडीए को कुल 273 सीटों पर जीत मिली। इसमें भाजपा के 255 प्रत्याशी चुनाव जीते। समाजवादी पार्टी के साथ-साथ आठ दलों का गठबंधन था। इसमें प्रसपा, महान दल, जनवादी पार्टी, अपना दल (कमेरावादी), आरएलडी, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और एनसीपी शामिल रहे। सपा की अगुआई वाले विपक्ष को 125 सीटें मिलीं। इसमें सपा के 111 प्रत्याशी चुनाव जीते। इसके अलावा कांग्रेस के दो और बसपा के एक प्रत्याशी को जीत मिली। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक ने भी दो सीटों पर जीत हासिल की। आम आदमी पार्टी की लगभग सभी सीटों पर जमानत जब्त हो गई। योगी आदित्यनाथ दोबारा मुख्यमंत्री बने। इसके साथ ही करीब तीन दशक के बाद किसी पार्टी ने लगातार दूसरी बार राज्य की सत्ता में वापसी की।
2. उत्तराखंड: राज्य के गठन के बाद से हर पांच साल में यहां सरकार बदल जाती थी। पहली बार हुआ है जब किसी पार्टी ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। इस चुनाव में भाजपा को 47 सीटों पर जीत मिली, जबकि कांग्रेस के खाते में केवल 19 सीटें गईं। पुष्कर सिंह धामी अपनी सीट से चुनाव हार गए, लेकिन उन्हें लगातार दूसरी बार मुख्यमंत्री बनाया गया। बाद में हुए उपचुनाव में वह जीते। दो सीटें बसपा के खाते में भी गईं। आम आदमी पार्टी की लगभग सभी सीटों पर जमानत जब्त हो गई।
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