अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: कुल्लू दशहरा के लिए रवाना हुए अधिष्ठाता खुडीजल, 150 किमी चलेंगे पैदल

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International Kullu Dussehra: Khudijal leaves for Kullu Dussehra, will walk 150 km

खुडीजल देवता।
– फोटो : संवाद

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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू के ढालपुर में अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के लिए देवताओं का आगमन शुरू हो गया है। रघुनाथ की नगरी सजने लगी है। 24 से 30 अक्तूबर तक देव महाकुंभ में अपनी मौजूदगी के लिए शुक्रवार को जिला कुल्लू के सबसे अमीर देवी-देवताओं में शुमार खुडीजल की यात्रा शुरू हो गई है। ढोल-नगाड़ों के साथ देवता अपने देवालय देहुरी से शुक्रवार दोपहर करीब 1:00 बजे रवाना हुए। इस बार देवता मंडी जिला के बगड़ाथाच, खौली व गाड़ागुशैणी होकर आ रहे हैं। शुक्रवार शाम को उनका पहला ठहराव नहर गांव में हुआ। इसके बाद 21 को बंजार, 22 को शमशी और 23 अक्तूबर को करीब 150 किलोमीटर का पैदल सफर कर ढालपुर अपने अस्थायी शिविर में पहुंचेंगे।

वहीं 21 अक्तूबर को जिला कुल्लू के सैंज, पार्वती व बंजार घाटी के करीब के करीब 50 से अधिक देवी-देवताओं की रथयात्रा शुरू होगी। वहीं बाह्य सराज आनी-निरमंड से भी देवता कोट पझारी, देवता टकरासी नाग समेत 10 से अधिक देवता कुल्लू के लिए रवाना होंगे। दशहरा उत्सव समिति ने इस बार जिला कुल्लू के 332 देवी-देवताओं को निमंत्रण दिया गया है। सोने-चांदी के देवरथों की सुरक्षा के लिए जिला पुलिस ने स्थानीय पुलिस थानों को निर्देश दिए हैं। खुडीजल के कारदार शेर सिंह, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कुमार दत्त शर्मा व पुजारी पूर्ण शर्मा ने कहा कि देवता खुडीजल अपने देवालय देहुरी से कुल्लू के लिए निकल गए हैं और तीन पड़ावों के बाद चौथे दिन 23 अक्तूबर शाम को दशहरा स्थल में पहुंच जाएंगे।

1660 में हुआ था कुल्लू दशहरा का आगाजकुल्लू दशहरा का शुभारंभ 1660 को हुआ था, जब भगवान रघुनाथ की मूर्ति को अयोध्या से कुल्लू लाया गया था। तत्कालीन कुल्लू के राजा जगत सिंह ने दशहरा को शुभारंभ किया था। राजा को गंभीर बीमारी से मुक्ति मिलने पर कुल्लू दशहरा का आयोजन किया गया था। राजा को रोगमुक्त करने के लिए दामोदर दास अयोध्या पहुंचकर अंगुष्ठ मात्र मूर्ति को कुल्लू लाए और मूर्ति का स्नान कर जल पीने के बाद राजा रोग से पूरी तरह ठीक हो गए थे। इसके बाद राजा ने अपना पूरा राजपाट रघुनाथ जी के नाम कर दिया और स्वयं उसके छड़ीबरदार बने। इस दौरान यह मूर्ति मकराहड़, मणिकर्ण, हरिपुर, नग्गर होते हुुए कुल्लू पहुंची थी। इन सभी स्थानों पर भगवान रघुनाथ के सम्मान में दशहरा मनाया जाता है। रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान रघुनाथ के सम्मान में दशहरा का आयोजन 1660 से हो रहा है।

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