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अतीक अहमद की फैमिली ट्री
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूपी में ढेरों ऐसे गैंगस्टर पैदा हुए जिन्होंने सालों तक अपने खौफ के नाम पर किसी राजा की तरह शासन किया। दबंगई के दम पर इन्होंने बाहुबली का तमगा हासिल किया और फिर सफेदपोश भी बने। आज हम उत्तर प्रदेश के उस कुख्यात डॉन अतीक अहमद के बारे में बता रहे हैं, जिसने कम उम्र में ही अपराध की काली दुनिया में अपने लिए जगह बना ली। अब उसी अतीक का परिवार अर्श से फर्श पर आ गया है। यूपी एसटीएफ ने आज (13 अप्रैल) झांसी में असद को एनकाउंटर में मार गिराया है और अतीक की पत्नी की तलाश पुलिस अब भी कर रही है। इससे पहले गुजरात की साबरमती जेल से यूपी लाए जा रहे अतीक ने मीडिया के एक सवाल पर कहा ही था कि हम मिट्टी में तो मिल ही गए हैं क्या बचा है। आइए जानते हैं अतीक और उसके परिवार के आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में विस्तार से…
10 अगस्त 1962 को अब के प्रयागराज और तब के इलाहाबाद स्थित चाकिया नाम के मोहल्ला में अतीक अहमद का जन्म हुआ। पिता फिरोज अहमद तांगा चलाकर परिवार चलाते थे। अतीक घर के पास में स्थित एक स्कूल में पढ़ने लगा। 10वीं में पहुंचा तो फेल हो गया। इस बीच, वह इलाके के कई बदमाशों की संगत में आ गया। जल्दी अमीर बनने के लिए उसने लूट, अपहरण और रंगदारी वसूलने जैसी वारदातों को अंजाम देना शुरू कर दिया। 1997 में उस पर हत्या का पहला मुकदमा दर्ज हुआ।
उस समय इलाहाबाद के पुराने शहर में चांद बाबा का खौफ हुआ करता था। चांद बाबा इलाहाबाद का बड़ा गुंडा माना जाता था। आम जनता, पुलिस और राजनेता हर कोई चांद बाबा से परेशान थे। अतीक अहमद ने इसका फायदा उठाया। पुलिस और नेताओं से सांठगांठ हो गई और कुछ ही सालों में वह चांद बाबा से भी बड़ा बदमाश बन गया। जिस पुलिस ने अतीक को शह दे रखी थी, अब वही उसकी आंख की किरकिरी बन गया।
अब उसे इन सबसे बचने का सबसे आसान तरीका राजनीति का लगा और फिर इसने 1989 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर इलाहाबाद पश्चिमी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा और जीत गया। निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राजनीति की शुरुआत करने के बाद अतीक समाजवादी पार्टी में शामिल हुआ फिर अपना दल में आ गया। अतीक पांच बार विधायक और एक बार फूलपुर से सांसद रहा।
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