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अतीत का अलीगढ़
– फोटो : अमर उजाला
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कटोरेनुमा आकृति में बसे अलीगढ़ में जलभराव आज के दौर में भी बड़ी समस्या है। हालांकि जिले में बहुत ज्यादा बारिश नहीं होती। जिले में बारिश का रिकार्ड 1844 ईस्वी से दर्ज करना शुरू किया गया। सभी छह तहसील मुख्यालयों में अंग्रेजों ने वर्षामापी यंत्र (रेन गेज) लगवाए थे। इसके अलावा टप्पल परगना के बालनपुर में भी एक यंत्र लगाया गया था। आधी सदी के अभिलेखों के मुताबिक जिले में औसत बारिश 635 मिली मीटर सालाना थी।
अंग्रेज अफसर लिखते हैं कि बालनपुर और पड़ोस की खैर तहसील में लगाए गए वर्षामापी यंत्रों की माप में इतनी भिन्नता देखी गई जो अविश्वसनीय थी। इस रिकार्ड को खारिज कर दिया गया। 1884 में अलीगढ़ में 900 मिली मीटर से ज्यादा बारिश दर्ज की गई थी। इसमें जिले के शहरी इलाके के लोगों को खासी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा था।
अतरौली तहसील में होती थी सबसे ज्यादा बारिश
जिले की विभिन्न तहसीलों में वर्षा का वितरण असमान था। दर्ज किए अभिलेख से पता चलता है कि जिले के पूर्वी और मध्य हिस्से में अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा बारिश होती थी। अतरौली तहसील में सबसे ज्यादा बारिश होती थी। इसका औसत लगभग 717 मिली मीटर था। जिले के दक्षिण पश्चिम में स्थित इगलास में औसत बारिश 574 था, जबकि अलीगढ़ और सिकंदराराऊ में बारिश जिले की औसत वर्षा से ज्यादा होती थी। सिकंदराराऊ में 671 और अलीगढ़ में 670 मिली मीटर सालाना बारिश होती थी। इसके बाद हाथरस में 635 और खैर में 607 मिली मीटर सालाना बारिश होती थी।
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