आस्था: 22 दिन में 400 किमी पैदल चलकर दिल्ली से मां चिंतपूर्णी के दरबार पहुंचे मां-बेटा

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दर्शन के लिए पहुंचे मां-बेटा। मां के दरबार में एक श्रद्धालु की तरफ से चढ़ाई गई चांदी की चरण पादुका।

दर्शन के लिए पहुंचे मां-बेटा। मां के दरबार में एक श्रद्धालु की तरफ से चढ़ाई गई चांदी की चरण पादुका।
– फोटो : संवाद

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मां चिंतपूर्णी के दरबार में दिल्ली से 22 दिन में 400 किमी पैदल यात्रा कर दर्शन के लिए रविवार को मां-बेटा पहुंचे। मंदिर पहुंचने पर पुजारी जीवन प्रकाश कालिया ने विधिवत रूप से पूजा अर्चना करवाई। मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालुओं ने यह पैदल यात्रा पूरी की। माता रानी के भक्तों में माता के प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है।

भक्तों की आस्था इतनी ज्यादा होती है कि श्रद्धालु कड़ी से कड़ी परीक्षा पार करके भी मां के दरबार में पहुंच ही जाते हैं। बेटे अनुज शर्मा के साथ आई उनकी मां नमिता शर्मा ने 21 जनवरी को दिल्ली से पैदल यात्रा शुरू की थी। वह दोनों 22 दिन बाद रविवार को माता रानी के दरबार में पहुंचे।

पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालु अनुज शर्मा, निवासी वी2-135 सफदरगंज एनक्लेव, नई दिल्ली ने बताया कि उन्होंने माता रानी से मन्नत मांगी थी जो पूरी हुई है। इसीलिए अपनी मां के साथ पैदल यात्रा कर चिंतपूर्णी मंदिर पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान बारिश के समय कठिनाई जरूर आई।

लेकिन मां के आशीर्वाद से हर कठिनाई दूर होती रही और वह लगातार पैदल यात्रा करते रहे। अनुज शर्मा पेशे से इंजीनियर हैं और दिल्ली में उनका अपना कारोबार है। वहीं, पुजारी जीवन प्रकाश कालिया ने बताया कि चिंतपूर्णी माता रानी के प्रति भक्तों की काफी आस्था रहती है। जिसके चलते यहां श्रद्धालु पैदल और दंडवत होकर माता रानी का शुक्रिया अदा करने पहुंचते हैं।

चरण पादुका को चांदी से किया सुसज्जित

विश्व विख्यात शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी के दरबार में रविवार को जालंधर के एक श्रद्धालु ने माता रानी के चरण पादुका को चांदी से सुसज्जित किया है। इस पर करीब ढ़ाई किलो चांदी लगाया गया है। करीब डेढ़ लाख रुपये खर्च कर चरण पादुका को चांदी से सजाया गया है।

बता दें कि रोजाना हजारों की संख्या में माता रानी के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते हैं और नकदी के अलावा सोना चांदी अर्पित करते हैं। चिंतपूर्णी मंदिर परिसर में मुख्य द्वार में पहले से ही स्थित माता की चरण पादुका पर यह कार्य पंजाब जालंधर के श्रद्धालु अशोक गुप्ता ने करवाया है। 

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