इधर भी राम, उधर भी राम…: अखाड़े ही नहीं, सियासी दांव-पेच के भी पहलवान थे मुलायम; ऐसे मजबूत किया वोट बैंक

[ad_1]

Lok Sabha Election 2024 Mulayam Singh was a wrestler not only in the arena but also in political maneuvers.

Mulayam Singh
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


1989 के चुनाव के बाद भाजपा नेतृत्व समझ गया कि उसका ग्राफ बढ़ने में मंदिर निर्माण के समर्थन और हिंदुत्व पर मुखरता की भूमिका है। अब उसका संकोच पूरी तरह खत्म हो चुका था। विश्व हिंदू परिषद की कार्ययोजना पर राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन चला रहे संगठनों की तरफ से श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए कारसेवा का आह्वान हुआ। 

उस समय भाजपा के अध्यक्ष थे लालकृष्ण आडवाणी, जो प्रखर हिंदुत्व के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने राम मंदिर की कारसेवा में शामिल होने के लिए  सोमनाथ से अयोध्या के लिए रथयात्रा निकाली। प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव सिर्फ अखाड़े के ही नहीं, सियासी दांव-पेच के भी पहलवान थे। 

भाजपा के पक्ष में हिंदुओं की लामबंदी, कांग्रेस के असमजंस और राम मंदिर के विरुद्ध मुस्लिमों में मुखरता देख उन्होंने भी राम नाम के सहारे ही अपना  वोट बैंक मजबूत करने की नीति पर काम शुरू कर दिया। उन्होंने अयोध्या में कारसेवा नहीं होने देने का एलान कर दिया।

कई मुद्दों को लेकर दिल्ली में तत्कालीन उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल की प्रधानमंत्री वीपी सिंह से खींचतान चल रही थी। भाजपा की हिंदू वोटों और मुलायम की मुसलमान वोटों की  लामबंदी की कोशिश से परेशान वीपी सिंह कैसे पीछे रहते। 

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *