[ad_1]

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अभियोजन की ओर से एटा के 11 साल बच्चे के अपहरण के मामले में पिता द्वारा प्रस्तुत किया गया फिरौती मांगने वाला कथित पत्र न साबित कर पाने से आजीवन कारावास की सजा को बदल दिया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को बच्चे को छुपाकर और गलत तरीके से कैद करने का दोषी माना और उसके तहत सात साल की सजा सुनाई। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति नलिन कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने इंद्रपाल सिंह व अन्य व श्रीपाल व अन्य की अलग-अलग याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है।
कोर्ट ने मामले में सभी आरोपियों को सात-सात साल की कारावास और दो-दो हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। इंद्रपाल और श्रीपाल ने जेल में 14 वर्ष बिता दिए। लिहाजा, कोर्ट ने उन्हें तुरंत जेल से रिहा करने का आदेश दिया। जबकि, कल्लू और महात्मा की जमानत निरस्त करते हुए दोनों को बाकी सजा काटने के लिए संबंधित कोर्ट में आत्मसमर्पण करने के लिए कहा।
[ad_2]
Source link