उत्तराखंड: पिथौरागढ़ हाईवे निर्माण के दौरान मलबा जंगल में डालने के जांच के आदेश, सैकड़ों पेड़ों को नुकसान

[ad_1]

Investigation Order into dumping of road cutting debris in forest Van Panchayat Samiti Champawat Uttarakhand

मलबा (प्रतीकात्मक)

विस्तार


कुमाऊं के टनकपुर-पिथौरागढ़ नेशनल हाईवे निर्माण के दौरान मलबा जंगल में डालने के मामले में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने जांच के आदेश दिए हैं। इस संबंध में वन पंचायत समिति सदस्य स्वांला, चंपावत की ओर से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की गई थी।

पत्र में कहा गया था कि टनकपुर और पिथौरागढ़ के मध्य सड़क निर्माण के दौरान स्वांला वन पंचायत के जंगल को करीब तीन किमी क्षेत्रफल में नुकसान पहुंचा है, जिसमें जंगल को करीब दो करोड़ रुपये की क्षति हुई है। इसी तरह से स्वांला के मिलान से लगी हुई वन पंचायत बस्टिवा मझेड़ा पंचायत में करीब पांच किमी क्षेत्रफल में जंगल में मलबा डालने से करीब तीन करोड़ और मिलान से आगे अल्मोड़ा की सीमा की तरफ सात किमी क्षेत्रफल में कम से कम चार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आरोप है कि कार्यदायी संस्था ने सड़क कटिंग का मलबा डंपिंग जोन में न डालकर जंगल में इधर-उधर फेंक दिया है।

ये भी पढ़ें…Doon Hospital: निर्दयी व्यवस्था…तीन घंटे में बनती है फाइल, दर्द से कराहती रहती है प्रसूता, बताई आपबीती

इससे सैकड़ों पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही ग्रामीणों के चारागाह प्रभावित हुए हैं। पानी की लाइनों, गूल और जलस्रोतों को भी नुकसान पहुंचा है। पत्र में इस नुकसान के लिए वन पंचायत को करीब नौ करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की गई है।

इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तकनीकी अधिकारी (वानिकी) डॉ. योगेश गैरोला की ओर से उत्तराखंड शासन को पत्र लिखकर पूरे मामले परीक्षण कराकर उचित कार्रवाई को कहा गया है। पत्र में कहा गया कि यदि शिकायत में किसी प्रकार से वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्राविधानों का उल्लंघन किया गया है तो कार्रवाई करने के साथ ही केंद्र को भी सूचित किया जाए।

 

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *