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Agra Suicide after murder
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आगरा की लॉयर्स काॅलोनी के रहने वाले तरुण उर्फ जॉली ने शनिवार रात को मां ब्रजेश देवी और बेटे कुशाग्र की हत्या के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। देर रात पोस्टमार्टम के बाद परिजन तीनों के शव फिरोजाबाद के नारखी क्षेत्र के पिपरौली गांव में ले गए। देर रात में एक साथ तीन चिताएं जलीं तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। हर किसी के जुबां पर एक ही बात थी कि तरुण को ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। सोमवार की सुबह से ही उनके पैतृक आवास पर आसपास के ग्रामीणों के आने का क्रम जारी था।
लाॅयर्स कॉलोनी निवासी दिवंगत अधिवक्ता मान सिंह चौहान के बेटे तरुण चौहान उर्फ जौली (43), पत्नी ब्रजेश देवी (72) और पौत्र कुशाग्र (12) के शव रविवार रात्रि करीब साढ़े नौ बजे उनके पैतृक गांव नारखी के पिपरौली पहुंचे। शव को लेकर तरुण के चचेरे भाई विक्रम सिंह अपने अन्य ग्रामीणों के साथ लाए थे। शव पहुंचने पर गांव में भीड़ लग गई। देर रात्रि करीब 11 बजे तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विक्रम सिंह ने बताया कि मां एवं तरुण काे मुखाग्नि चचेरे भाई विनोद कुमार तथा कुशाग्र को मुखाग्नि उसके विनोद के बेटे करन ने दी। हर किसी की जुबां पर यही बात थी कि तरुण पर भले ही कर्ज हो गया था, लेकिन उसे ऐसा कदम नहीं उठाना चाहिए था। आखिर उसके परिवार में अब बचा ही कौन है।
बार-बार बेसुध हो रही थी पत्नी
पिपरौली निवासी तरुण चौहान की पत्नी रजनी घर में एक साथ तीन मौत से पूरी तरह से टूट गई। वह कभी पति तरुण को तो कभी अपने लाडले बेटा कुशाग्र को याद करके बिलख रही थी। परिवार की महिलाएं उसे होश में लाने के लिए पानी चेहरे पर छिड़क रहीं थीं। महिलाओं का कहना था कि यदि खाटू श्याम बाबा के दर्शन करने नहीं गई होती तो रजनी की भी जान नहीं बचती। इसके साथ यह भी कहती दिखीं कि ईश्वर को यही मंजूर था।
गांव में पसरा रहा सन्नाटा
गांव पिपरौली की गलियों में सोमवार को पूरे दिन सन्नाटा पसरा था। मान सिंह के घर से महिलाओं के चीत्कार की आवाज ही सुनाई दे रही थी। घर पर लोगों का आना-जाना लगा हुआ था। हर कोई गम में डूबा हुआ था। पिपरौली गांव में एक गली में तरुण चौहान का पैतृक मकान है। परिवार के सदस्यों के घर पर उनकी पत्नी रजनी सिंह के साथ उनके चचेरे भाई विक्रम सिंह सहित गांव के लोग मौजूद थे। हर किसी की जुबां पर तरुण के कदम की चर्चा थी। चचेरे भाई विक्रम सिंह ने कहा कि तरुण अपनी परेशानी हर किसी से बयां नहीं करता था। पत्नी तक को नहीं बताता था। अंदर ही अंदर खुद ही उसका समाधान खोजने का प्रयास करता था।
कर्ज के दलदल में ऐसा फंसा फिर नहीं निकल सका
तरुण बचपन से ही शहर में रहा था। इस कारण गांव कभी-कभार ही आना होता था। चचेरे भाई विक्रम सिंह बताते हैं कि तरुण शुरुआत से ही मेहनती था। उसने आगरा स्थित पाइप की फैक्टरी में बतौर मैनेजर काम शुरू किया तो पूरी जिम्मेदारी निभाई। जिस फैक्टरी का टर्नओवर 60 से 70 लाख का था। उसे बढ़ाकर पांच करोड़ तक ले गया। बीच में फैक्टरी बंद होने के साथ उधारी के पैसे फंसने पर वह कर्जदार हो गया था। हालांकि कर्ज के दल-दल से निकलने के लिए भी ट्रेडिंग कंपनी बनाई थी, ताकि किसी तरह से बाजार में फंसे पैसे को निकाला जा सके। मगर, फैक्टरी बंद होने के कारण उसे भी काफी धक्का लगा था। फैक्टरी से पिछले तीन माह से वेतन भी नहीं मिला था। इस कारण भी वह परेशान रहता था।
बैंक एकाउंट एवं डायरी से पता चलेगी बकाया राशि
विक्रम सिंह ने बताया कि मैनेजर होने के नाते वह बाजार में माल की सप्लाई देता था। उसका लाखों रुपया मार्केट में फंस गया है। इसकी जानकारी उसके मोबाइल के साथ डायरी में है। लैपटॉप में भी हिसाब का पूरा ब्योरा है। इसको चेक करके आगे कार्रवाई की जाएगी।
फैक्टरी संचालक नहीं आया
घटना के बाद फैक्टरी संचालक परिवार के लोगों से नहीं मिला। आरोप है कि संचालक ने गांव आना भी उचित नहीं समझा। इस तरह का व्यवहार गलत है।
गांव की जमीन भी बेची थी
परिवार के लोगों ने बताया कि मान सिंह पर गांव में 29 बीघा के करीब जमीन थी। वर्तमान में 18 बीघा के करीब जमीन उनके पास है। करीब 11 बीघा जमीन ताऊ ने कर्ज चुकाने के कारण ही बेच दी थी।
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