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घटनास्थल के दृश्य और मौके पर तैनात पुलिसकर्मी
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के औरंगाबाद के नबीनगर थाना क्षेत्र के तेतरिया में सोमवार को दोपहर बाद मॉब लिंचिंग की घटना में हुई पांच मौतों ने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है। इस घटना से मानवता तार-तार और शर्मसार भी हुई है। इस घटना ने मानवीय स्वभाव में सहनशीलता की निरंतर कमी का भी संकेत दिया है, जो कि बेहद खतरनाक है। ऐसी प्रवृत्ति को पनपने से रोकने के लिए समाज में सहिष्णुता का नैतिक पाठ पढ़ाया जाना जरूरी महसूस हो रहा है। मॉब लिंचिंग की तमाम घटनाओं के संकेत साफ है कि कोई भी शख्स किसी के अपने विपरीत विचारों या विश्वासों को सहन करने या उन्हें सम्मान देने को तैयार नहीं है।
ऐसे भड़का भीड़ का गुस्सा
जानकारी के मुताबिक, औरंगाबाद के नबीनगर के तेतरिया की मॉब लिंचिंग की घटना में सामने आया कि मामले की शुरुआत दुकान के सामने कार पार्क करने से हुई। दुकानदार ने जब कार सवारों को दुकान के सामने कार पार्क करने से मना किया, क्योंकि ऐसा किए जाने से उसकी दुकानदारी प्रभावित हो रही थी। लेकिन कार सवारों में से एक मो. मोजाहिद ने दुकानदार की बात को अपनी तौहीन समझी, वह इसे बर्दाश्त नहीं कर सका। उसने गुस्से में आकर जेब से पिस्तौल निकाली और दुकानदार पर गोली चला दी। लेकिन गोली दुकानदार को न लगकर उसके बगल में बैठे महुअरी गांव के बुजुर्ग ग्रामीण रामाश्रय चौहान (60) को लग गई। फिर घायल की इलाज के लिए ले जाने के दौरान रास्ते में ही मौत हो गई। इसके बाद बात बिगड़ गई, जिससे ग्रामीणों द्वारा की गई मॉब लिंचिंग में कार में सवार पांच युवकों में से चार को अपनी जान गंवानी पड़ी।
गुस्साए ग्रामीणों ने चार युवकों की ली जान
गोली लगने से बुजुर्ग की मौत हो जाने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने कार में सवार पांचों लोगों को वाहन से खींचकर लाठी-डंडे और लात-घूंसे से बेरहमी से पीटने लगे। उन्होंने पांचों को पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। भीड़ द्वारा पीटे जाने के बाद इलाज के दौरान इनमें से तीन लोगों की मौत हो गई। जबकि दो घायलों का औरंगाबाद सदर अस्पताल में इलाज चल रहा था।
भीड़ द्वारा पीटे जाने के कारण कार सवार पांच लोगों में से तीन की अब तक मौत हो चुकी है। तीनों मृतक झारखंड के पलामू जिले के हैदरनगर के निवासी हैं। मृतकों में मो. अरमान, मो. अंजार और मो. मोजाहिद शामिल हैं। औरंगाबाद में भर्ती घायलों को मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया रेफर किया गया है। अभी फिलहाल गया में मो. वकील और अजीत शर्मा भर्ती हैं। इनमें मो. वकील की हालत बेहद नाजुक बताई जा रही है। पांच कार सवारों में से सोमवार को दो की मौत नबीनगर रेफरल अस्पताल में और एक की मौत मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल गया में मंगलवार को हुई है। बताया जा रहा है कि कार में सवार सभी लोग मौज मस्ती करने के इरादे से सासाराम के शेरशाह का रौजा घूमने जा रहे थे।
मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सहिष्णुता जरूरी
मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए सहिष्णुता जरूरी है। जब व्यक्ति में सहिष्णुता की भावना होगी, तभी वह दूसरे के विचारों, व्यवहार और धार्मिक भावनाओं को सम्मान देगा। ऐसा होने पर ही मॉब लिंचिंग की घटनाएं रुकेंगी। यह सिर्फ समुदाय विशेष के लिए नहीं बल्कि सबके लिए जरूरी है। मॉब लिंचिंग की अधिकांशतः घटनाएं असहिष्णुता और अन्य धर्म तथा जाति के प्रति घृणा का ही परिणाम रही है। तेतरिया की घटना भी इसी ओर संकेत कर रही है।
विशेषज्ञों की राय है कि मॉब लिंचिंग की घटनाएं सिर्फ सख्त कानून बनाने से रुकने वाली नहीं है। इसके लिए मोरल एजुकेशन की भी जरूरत है। साथ ही इसके लिए सभी समाज के प्रबुद्धजनों और सभी धर्म गुरुओं को भी आगे आना होगा। अगर किसी भी मजहबी किताब में हिंसा को प्रतिहिंसा से जायज ठहराने की बात हो भी तो, उन बातों को वर्तमान संदर्भ में नकारने की हिम्मत दिखानी होगी। यह खुलकर कहने की दिलेरी दिखानी होगी कि अमुक किताब में वर्णित बातें आज के जमाने के अनुकूल नहीं हैं। यह सब किए जाने के बाद ही मॉब लिंचिंग रुकेगी। वहीं, कानून तो अपना काम करेगी ही।
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