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सांकेतिक तस्वीर।
– फोटो : iStock
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कहते हैं ना, पुलिस अगर चाहे तो कुछ कर सकती है। कुछ ऐसा ही ऑपरेशन शिकंजा में देखने को मिल रहा है। पुलिस गंभीर मामलों की पैरवीकार बन रही तो अभियुक्त को सजा दिलाकर 20 साल पुराने दर्द को चंद दिनों में मिटा दे रही। कोर्ट, जज, सरकारी अधिवक्ता सब तैयार हैं, लेकिन कमी थी तो सिर्फ पुलिस की रुचि की।
अब अभियान के तहत पुलिस अधिकारी लगातार माॅनीटरिंग कर रहे हैं तो फिर आजीवन कारावास तक की सजा भी हो रही। पुलिस बीते साल 2022 में 138 से अधिक अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा दिलाने में सफल रही है।
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जानकारी के मुताबिक, पुलिस जब मामलों पर ध्यान नहीं देती है और वादी आर्थिक रूप से कमजोर होते हैं तो इसका फायदा अभियुक्तों को मिलता है। पैरवी के अभाव में अभियुक्त बरी तक हो जाता है। इस तरह के मामले बढ़ने के बाद पुलिस ने ऑपरेशन शिकंजा चलाने का फैसला किया।
पैरवी में पुलिस कमजोर न पड़े इसके लिए आईजी जे. रविंद्र और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर खुद हर महीने बड़े मामलों की समीक्षा करते हैं। साथ ही सभी एसपी और सीओ को केस बांट दिए हैं, ताकि कमी मिलने पर उनसे सीधा सवाल जवाब हो सके। अभियान की सफलता को देखते हुए ही आईजी ने हर दरोगा को दो मामलों की पैरवी का आदेश भी दिया। इसके बाद से कार्यालय में तैनात दरोगा भी ऑपरेशन शिकंजा में मददगार बने हैं।
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