कवायद: देहरा में कोबरा प्रशिक्षण केंद्र की फिर जगी उम्मीद, सीआरपीएफ के अधिकारियों ने किया दौरा

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Central Reserve Police Force Cobra Training Center In Dehra Kangra

CRPF Cobra Commando
– फोटो : CRPF

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करीब तीन साल से ठंडे बस्ते में पड़े कोबरा ट्रेनिंग सेंटर को देहरा के हरिपुर (सपड़ू) में खोलने की कवायद शुरू हो गई है। सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की एक टीम ने इलाके का दौरा किया है। सीआरपीएफ के डीआईजी एसएस राणा के नेतृत्व में एक टीम दौरा कर गई है। जिससे बाद माना जा रहा है कि उपमंडल देहरा में सीआरपीएफ का कोबरा ट्रेनिंग सेंटर खोलने को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार आगे कदम आगे बढ़ा रही है।

साल 2016 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उत्तर भारत में सीआरपीएफ का एक कोबरा ट्रेनिंग सेंटर खोलने की योजना बनाई थी। जिसके बाद कई राज्यों में जमीन देखने के बाद सीआरपीएफ ने उपमंडल देहरा में हरिपुर के सपड़ू की भूमि को काफी पसंद किया। यह भूमि पौंग जलाशय के साथ लगती थी और जवानों को हर प्रकार का प्रशिक्षण देने के लिए उपयुक्त थी। जिसके बाद यहां पर ट्रेनिंग सेंटर खोलने की कवायद शुरू हुई थी।

उसके बाद कई दफा सीआरपीएफ के आला अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मिलकर चिन्हित भूमि का निरीक्षण किया, लेकिन कोविड काल के बाद सारी प्रक्रिया ठप होकर रह गई थी। प्रशासन ने सीआरपीएफ के कोबरा ट्रेनिंग सेंटर के लिए सपड़ू गांव में करीब 91 हेक्टेयर जगह चिन्हित की है। यह सारी भूमि हरिपुर कॉलेज के साथ लगती है। यहां पर ट्रेनिंग सेंटर स्थापित होने के बाद सीआरपीएफ जवानों को सभी तरह की ट्रेनिंग सुविधा उपलब्ध होगी। यहां पर अधिकतर वन भूमि है। ऐसे में वन सरंक्षण अधिनियम (एफसीए) की अनुमति के बाद ट्रेनिंग सेंटर स्थापित हो सकेगा।

पैरा मिलिट्री फोर्स को भी मिलेगी ट्रेनिंग

हरिपुर के सपड़ू में कोबरा ट्रेनिंग सेंटर स्थापित होने के बाद यहां पर अन्य पैरा मिलिट्री फोर्स को भी ट्रेनिंग दी जाएगी। साथ ही हिमाचल पुलिस के जवानों को भी कमांडो ट्रेनिंग दी जा सकेगी।  अभी तक पुलिस जवानों को कई प्रकार के प्रशिक्षणों के लिए बाहरी राज्यों का रुख करना पड़ता था।

इधर, इस बारे डीएफओ सनी वर्मा ने पुष्टि करते हुए बताया कि सीआरपीएफ के आला अधिकारियों की एक टीम ने दौरा किया है। उन्होंने बताया कि हरिपुर के निकट सपड़ू में 91 हेक्टेयर भूमि पर कोबरा ट्रेनिंग सेंटर खोला जाना प्रस्तावित है। यहां पर अधिकतर वन भूमि है। वन भूमि की मंजूरी का केस पर्यावरण एवं वन मंत्रालय को भेजा गया है।

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