काशी तेलुगु संगमम: लोक संगीत के आलोक से दमका गंगातट, कलाकारों के अभिनय ने दर्शकों को किया रोमांचित

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Folk music performance by Telangana artists in Kashi Telugu Sangamam thrilled audience

Kashi Telugu Sangamam
– फोटो : अमर उजाला

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काशी तेलुगु संगमम का समापन समारोह लोक संगीत के आलोक से दमका। कलकल करती प्रवाहमान गंगा भी इसके उजास में निखर उठी। कलाकारों ने दक्षिण और उत्तर

भारत के लोक कला से दर्शकों को परिचित कराते हुए उन्हें रोमांचित किया।

संस्कृति मंत्रालय, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज व दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तंजावूर की ओर से नमो घाट पर आयोजित तीन दिवसीय काशी तेलुगु संगमम में

तेलंगाना के 90 कलाकारों के अलावा काशी और प्रयागराज के कलाकारों ने भी प्रभावी प्रस्तुतियों से भी सबको आनंदित किया। आगाज केपी रमेश के नेतृत्व में जनजाति

लोक कलाकारों के कोम्मु कोया नृत्य से हुआ। 

उन्होंने तेलंगाना के जनजातियों में प्रचलित इस नृत्य को पेश कर मंत्रमुग्ध कर दिया। फिर हिमागिरी के नेतृत्व में लंबाड़ी नृत्य की प्रस्तुति हुई। इसके जरिए राष्ट्रीय एकता व

समृद्धि की भावना को प्रकट किया। सुदर्शन दल के कलाकारों ने गुस्साड़ी नृत्य पेश किया। उन्होंने इससे शिव-पार्वती की कथाओं और पुराणों के संदेश दिए। एलन जंपैया के

दल ने मथुरी लोकनृत्य प्रस्तुत किया। यह नृत्य तेलंगाना के गांवों और नगरों में मनाए जाने वाले त्योहारों और समारोहों में प्रमुख रूप से प्रदर्शित किया जाता है। 

डॉ. वनाजा उदय के दल ने कुचिपुड़ी नृत्य पेश किया। इसके बाद काशी के कलाकारों की प्रस्तुति हुई। निवेदिता शिक्षा सदन बालिका इंटर कॉलेज में संचालित व्याख्या केंद्र

के प्रशिक्षु कलाकारों ने कजरी से विभोर किया। सुचरिता गुप्ता के निर्देशन में उन्होंने मईया झूले चलन झुलनवा…, अवध में अईहे राम विराजहि मंदिरवा…, रामलला प्रिय मोरे

नयन के कजरा होइहें…, बाबा विश्वनाथ मंदिरवा सोनवा चमचम… आदि नृत्यों से दर्शक झुम उठे। विभा पांडेय, पद्मा पाठक, पलक, पूजा, ऋद्धि, काव्यश्री, खुशी, चांदनी गायन

में साथ दिया। जबकि संवादिनी पर पूनम शर्मा व ढोलक पर कैलाश जायसवाल ने संगत की। 

उदय प्रताप पब्लिक स्कूल व्याख्या केंद्र प्रशिक्षु कलाकारों ने ममता शर्मा के निर्देशन में कजरी की रसपूर्ण प्रस्तुति से तरंगित किया। उन्होंने राम जी ले जनमवा…, श्रीराम

जानकी मेरे सीने में…शंकर तेरी जटा में… से प्रभु की महिमागान किया। तबले पर संगीत कुमार, ऑर्गन पर दिलीप ने संगत की। हारिका के दल ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना

के लोकप्रिय नृत्य डप्पुलु नृत्य पेश किया। अंतिम प्रस्तुति कृष्णा दल के ओग्गु ढोल नृत्य की रही। संयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा,

धन्यवाद ज्ञापन अजय गुप्ता और संचालन डॉ. प्रितेश आचार्य ने किया।

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