काशी विश्वनाथ मंदिर : हाईकोर्ट ने कहा- भाइयों की आपसी लड़ाई पर कैसे दाखिल हो सकती है जनहित याचिका

[ad_1]

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर में रंगभरी एकादशी पर दो वर्षों से पुरातन शिव पार्वती की मूर्ति की पूजा न होने को लेकर दाखिल याचिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि दो भाइयों की आपसी लड़ाई पर जनहित याचिका कैसे हो सकती है। फिलहाल कोर्ट ने इसे रिवीजन में सुनवाई के लिए रख दिया, लेकिन समयाभाव की वजह से शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी। संभावना है कि अब इस मामले में अगले हफ्ते सुनवाई होगी। चंद्रमौली पांडेय की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की खंडपीठ कर रही थी।

याची के अधिवक्ता सौरभ तिवारी और अमिताभ ने तर्क दिया कि कॉरिडोर बनने से पहले तक होली के दौरान रंगभरी एकादशी में पूर्व महंत आवास से परंपरागत शिव-पार्वती की शोभा यात्रा निकाली जाती थी। अब शिव पार्वती की नई रजत प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापित किया जा रहा है, जो शिव भक्तों की आस्था के साथ खिलवाड़ है। इसके अलावा काशी विश्वनाथ मंदिर अधिनियम 1983 की धारा 14 का उल्लंधन है। इस एक्ट के मुताबिक काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की यह जिम्मेदारी है कि वह पुरानी परंपरागत पूजा को परंपराओं के मुताबिक संपादित कराएं। लेकिन, दो बरस से ऐसा नहीं हो रहा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि भाइयों की लड़ाई पर जनहित याचिका कैसे दाखिल हो सकती है। यह एक सिविल विवाद है।

 

इस पर याची की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि वह शैव है और नई परंपरा काशी विश्वनाथ मंदिर एक्ट का उल्लंघन है। सरकार की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा शर्मा ने मामले की सुनवाई रिवीजन में करने की मांग रखी ताकि अपर महाधिवक्ता सरकार का पक्ष रख सकें, लेकिन समयाभाव की वजह से रिवाइज में नंबर नहीं आने से मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। अब अगले हफ्ते इसकी सुनवाई की संभावना बताई जा रही है।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *