[ad_1]

वायलिन बजाते अरविंद पांडेय
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एक प्यार का नगमा है, मौजों की रवानी है, जिंदगी और कुछ भी नहीं तेरी-मेरी कहानी है….की धुन वायलिन पर बज रही थी और हर एक शख्स की आंखें आंसूओं से भीगी हुई थीं। कैंसर पीड़ित अरविंद पांडेय जैसे-जैसे मन के भावों को वायलिन के तारों पर छेड़ रहे थे तो जीवन के साथ बहते हुए संगीत की धुन नश्वर जीवन का अहसास करा रही थीं।
शुक्रवार को वाराणसी स्थित महामना मालवीय कैंसर संस्थान का सभागार डॉ. अरविंद पांडेय की सुमधुर वायलिन वादन से गूंज उठा। सुप्रसिद्ध वायलिन वादक प्रो. एन राजम के शिष्य डॉ. अरविंद ने तीन घंटे तक वायलिन पर संगीत का जादू बिखेरा। दर्शक वायलिन की धुनों पर वाह-वाह कर उठे, लेकिन मन में टीस भी थी।
ये भी पढ़ें: बालिका वधू बनने से बचाया;15 साल की दुल्हन से शादी करने पहुंचा 35 साल का दूल्हा, मंडप में धमकी पुलिस
अब दवाएं भी काम नहीं कर रहीं
कोलन कैंसर से जूझ रहे अरविंद पांडेय अंतिम दौर में हैं। अब दवाएं भी काम नहीं कर रही हैं। उनकी अंतिम इच्छा थी कि वह मंच से वायलिन बजाएं और पूरी दुनिया उन्हें सुने। उनको सुनने के लिए कैंसर अस्पताल के चिकित्सक, मरीज और शहर के 150 से ज्यादा लोग मौजूद थे।
[ad_2]
Source link