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कौशाम्बी : कौशांबी महोत्सव को संबोधित करते सीएम योगी।
– फोटो : अमर उजाला।
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लोकसभा चुनाव के ठीक एक साल पहले और इसी माह संभावित नगर निकाय चुनाव के दौरान हुए कौशाम्बी महोत्सव से दोआबा को काफी उम्मीदें थीं। ऐसे मौके पर देश के गृहमंत्री और सूबे के मुखिया आएंगे तो कुछ न कुछ तोहफा देकर ही जाएंगे। हालांकि, अमित शाह और योगी आदित्यनाथ आए। जिले को छह अरब से अधिक की परियोजनाओं की सौगात दी, लेकिन दोआबा की झोली फिर भी खाली ही रह गई। विकास में काफी पिछड़े जिले को कुछ नया नहीं मिलने से लोग मायूस है।
कौशाम्बी महोत्सव को लेकर भले ही पूरी कसरत सरकारी मशीनरी ने की हो, लेकिन हकीकत में यह कार्यक्रम कौशाम्बी विकास परिषद का है। जब से परिषद ने इस आयोजन की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है, तब से लेकर अब तक दो बार महोत्सव मनाया जा चुका है।
सबसे पहले वर्ष 2017 में फिर दूसरी बार वर्ष 2018 में यह आयोजन हुआ था। पहली बार जब महोत्सव मनाया गया तब भाजपा प्रदेश में सत्ता हासिल कर चुकी थी, लेकिन नई-नई सरकार बनी थी, इसलिए उस वक्त दल का कोई बड़ा चेहरा महोत्सव के मंच की रौनक नहीं बढ़ा सका था।वर्ष 2018 में जब आयोजन हुआ तो पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका उद्घाटन करने आए। जिला मुख्यालय मंझनपुर के डायट मैदान में सजे पंडाल के मंच से सूबे के मुखिया ने कौशाम्बी को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की घोषणा की थी। जिले से होकर गुजरने वाले राम वन गमन मार्ग की घोषणा भी यहीं पर की थी। अपने आप में दोनों ही प्रोजेक्ट कौशाम्बी के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं थे।
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