क्या है प्राचीन टीला विवाद: मुस्लिम पक्ष का दावा खारिज, मस्जिद-कब्रिस्तान नहीं, वहां है लाक्षागृह और शिव मंदिर

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What is dispute about ancient mound: Muslim side claims, Mosque cemetery Court accepted Lakshgriha Shiv temple

बरनावा में प्राचीन टीला।
– फोटो : अमर उजाला

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बागपत में बरनावा के प्राचीन टीले को लेकर 54 साल से चल रहे मामले में सोमवार को फैसला आया। जहां मुस्लिम पक्ष की तरफ से दरगाह, मस्जिद व कब्रिस्तान होने का दावा करते हुए दायर की गई याचिका को सिविल जज जूनियर डिवीजन प्रथम ने खारिज कर दिया। न्यायालय ने वहां महाभारत कालीन लाक्षागृह और शिव मंदिर मानते हुए जमीन पर हिंदुओं को मालिकाना हक दिया है।

बरनावा के रहने वाले मुकीम खान ने वर्ष 1970 में मेरठ की अदालत में वाद दायर किया था। जिसमें लाक्षागृह गुरुकुल के संस्थापक ब्रह्मचारी कृष्णदत्त महाराज को प्रतिवादी बनाया गया था। इसमें मुकीम खान की तरफ से दावा किया गया था कि बरनावा में प्राचीन टीले पर खसरा संख्या 3377 की 36 बीघा 6 बिस्से 8 बिस्वांसी जमीन है। जिस पर करीब 600 साल पहले हजरत शेख बदरुद्दीन ने इबादत की और वहीं दफन हो गए। जहां उनकी दरगाह, बड़ा चबूतरा बतौर मस्जिद थी। उनके दफन होने के बाद सैकड़ों वर्ष से लोगों को मरने पर यहां दफन करना शुरू कर दिया गया और यहां कब्रिस्तान में हजारों कब्र मौजूद है।

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