[ad_1]

डॉक्टर भगवान दास।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
वर्ष 2008 में चौरीचौरा का एक नर्सिंग होम चलाने वाले प्रतिष्ठित डॉ. भगवानदास हत्या के आरोप में घिर गए। उनके साले ने आरोप लगाया कि इंजेक्शन देकर डॉक्टर ने बहन की हत्या कर दी। आनन-फानन में पुलिस ने केस दर्ज किया और डॉक्टर को जेल भेज दिया। तब उनके बेटे की उम्र महज पांच साल थी। हाईकोर्ट से 18 अप्रैल 2022 में वह बेगुनाह साबित हो गए।
वह बाहर तो आए, लेकिन तब तक उनकी जिंदगी में सब कुछ बदल चुका था। बेटा भी जवान हो चुका था। ऐसे एक डॉक्टर ही नहीं, व्यापारी और तमाम प्रतिष्ठित हस्तियों समेत तमाम पीड़ित हैं, जिन्हें बेगुनाह होते हुए भी सजा या पुलिसिया उत्पीड़न झेलना पड़ा। ऐसे हालात से बचाने के लिए कप्तान ने आपराधिक न्याय प्रणाली (क्रिमिनल जस्टेस सिस्टम) को मजबूत करने पर जोर दिया है। इस तरह बारीक जांच के जरिए बेगुनाह लोग उत्पीड़न से बचाए जा रहे हैं।
डॉ. भगवानदास बताते हैं, न बेटे का बचपना देख पाया और न ही उसे पिता का समुचित प्यार-दुलार मिला। पेशा भी तबाह हो गया। हालांकि, अब नर्सिंग होम को डॉक्टर ने अपनी मेहनत से फिर से खड़ा कर दिया है, लेकिन उन्हें इस बात का मलाल है कि जिंदगी के 14 साल उन्होंने उस गुनाह की सजा काटी, जो उन्होंने की ही नहीं।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में हादसा: धर्मशाला ओवरब्रिज पर चलती कार में आग लगी, चालक ने कूदकर बचाई जान
[ad_2]
Source link