खेतीबाड़ी: प्रदेश में बोरी वाली दानेदार खाद की सप्लाई घटाने की तैयारी, नैनो यूरिया-डीएपी को दिया जाएगा बढ़ावा

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IFFCO Focus on Nano Liquid Urea and DAP  Bag Fertilizer supply will be reduced by 25 percent

नैनो डीएपी खाद का ट्रायल करते विशेषज्ञ। (फाइल फोटो)
– फोटो : संवाद

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प्रदेश में बोरी वाली दानेदार खाद की सप्लाई एक वर्ष के भीतर 25 प्रतिशत तक कम होगी। विभिन्न जिलों को आने वाली दानेदार खाद की आपूर्ति धीरे-धीरे कम होने लगी है। इसके स्थान पर नैनो खाद के प्रयोग का सुझाव दिया जा रहा। इफ्को की ओर से यह निर्णय नैनो यूरिया और डीएपी को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है। प्रदेश में प्रति वर्ष 1,08,000 मीट्रिक टन खाद की खेप आती है।

इसमें 72,000 मीट्रिक टन बोरी वाली दानेदार यूरिया और 28,000 मीट्रिक टन 12-32-16 खाद की खेप आती है। बाकी खेप पोटाश की होती है। बताया जा रहा है कि दानेदार खाद को तैयार करने के लिए 40 प्रतिशत कच्चा माल विदेश से आयात करना पड़ता है। इसके साथ सरकार को हर बोरी पर करीब 1,000 से 2,500 रुपये सब्सिडी देनी पड़ रही है।

इस कारण केंद्र सरकार पर करोड़ों रुपये का बोझ पड़ रहा है। इससे उबरने का एकमात्र विकल्प यही है कि बोरी वाली दानेदार खाद की सप्लाई को कम कर दिया जाए। किसान रमेश कुमार, रविंद्र सैनी, दिनेश कुमार, देसराज ने बताया कि अगर नैनो खाद के छिड़काव की प्रक्रिया सुगम होती है तो उन्हें इसके इस्तेमाल में कोई परेशानी नहीं है।

खासकर मक्की की बड़ी फसल पर नैनो खाद का छिड़काव स्प्रे पंप से असंभव है। अगर भविष्य में इसके लिए ड्रोन का इस्तेमाल होता है तो यह एक अच्छा कदम होगा। वहीं, इफ्को ऊना के क्षेत्रीय अधिकारी माशूक अहमद राह ने बताया कि किसानों को लंबे समय से बोरी वाली खाद की आदत रही है। जागरूकता शिविरों के माध्यम से इस आदत को नैनो यूरिया की ओर मोड़ा जा रहा है। नैनो के छिड़काव के लिए ड्रोन का प्रयोग किया जा सकता है।

जल्द शुरू होगा ड्रोन का इस्तेमाल

नैनो खाद के इस्तेमाल में सबसे बड़ी समस्या फसलों के बड़े पौधों पर छिड़काव करने में आ रही है। इस समस्या को दूर करने के लिए हर जिले में ड्रोन की खेप सितंबर में आने की उम्मीद है। ऊना जिले में भी दो ड्रोन लाए जा रहे हैं। इसके लिए चरूड़ू और नंगल खुर्द के निवासी दो लोगों की ट्रेनिंग करवाई गई है। इससे बड़े पौधों पर कम समय में किसान खाद का छिड़काव करवा पाएंगे। किसानों को ड्रोन से एक कनाल में छिड़काव के लिए 40 से 50 रुपये तक चुकाने होंगे।

बोरी वाली दानेदार खाद की खेप आने वाले एक वर्ष में 25 प्रतिशत तक कम होगी। इससे पर्यावरण में फैल रहा प्रदूषण कम होगा और सरकार पर सब्सिडी का बोझ भी कम हो जाएगा। नैनो खाद का इस्तेमाल करने वाले किसानों की संख्या बढ़ने लगी है और इसके अच्छे नतीजे भी मिल रहे हैं। – भुवनेश पठानिया, प्रबंधक, हिमाचल प्रदेश राज्य विपणन, इफ्को

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