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गंगा पुष्कर कुंभ
– फोटो : अमर उजाला
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बनारस में उत्तरवाहिनी का किनारा उत्तर और दक्षिण के मिलन का फिर से साक्षी बना। बृहस्पति के राशि परिवर्तन के साथ ही गंगा पुष्कर कुंभ महोत्सव गंगा के तट पर आरंभ हो गया। श्रद्धालुओं ने पहले ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान किया और इसके बाद काशीपुराधिपति का ध्यान किया।
अस्सी से दशाश्वमेध घाट के बीच श्रद्धालुओं ने पूर्वजों की निमित्त अनुष्ठान किए और इसके बाद शहर के मंदिरों की परिक्रमा आरंभ हो गई। शनिवार को काशी में दक्षिण भारतीय समुदाय का गंगा पुष्कर महोत्सव विधि-विधान से आरंभ हुआ। गंगा के तट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति, पापों से मुक्ति और सौभाग्य की कामना से दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं ने अनुष्ठान आरंभ किए।
गंगा आरती में भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
पार्थिव शिवलिंग स्थापित करने के साथ ही रुद्राभिषेक, रुद्री पाठ और पूजन की प्रक्रिया भी अनवरत शुरू हो गई। हनुमान घाट, मानसरोवर घाट, चौकी घाट, शंकराचार्य घाट, केदारघाट, पंचगंगा, मणिकर्णिका और दशाश्वमेध घाट पर स्नान, दान, तर्पण और पूजन के अनुष्ठान चलते रहे। इसके बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर, बाबा कालभैरव, बिंदुमाधव, मां विशालाक्षी, दुर्गाकुंड, संकटमोचन समेत शहर के सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने दर्शन पूजन किया। शाम को गंगा घाट पर होने वाली गंगा आरती में भी श्रद्धालुओं की भारी संख्या रही।
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