गुलदार की दहशत: प्रकृति ने इन्हें मांसाहारी बनाया, घास तो खाएंगे नहीं…पढ़ें क्या कहते हैं शिकारी

[ad_1]

Leopard in Uttarakhand Hunter Joy Hukil and Lakhpat Special Interview

शिकारी लखपत और शिकारी जॉय हुकिल
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


राज्य बनने के बाद गुलदार 500 से अधिक लोगों को शिकार बना चुका है, जबकि 1,850 से अधिक लोगों को जख्मी कर चुका है। प्रकृति ने उसे मांसाहारी बनाया है, ऐसे में वह घास तो खाएंगे नहीं। जंगल में जब उसे शिकार नहीं मिलता, तब वह मानव बस्तियों का रुख करता है।

यह कहना है चौपड़ा, पौड़ी के लाइसेंसी शिकारी ज्वॉय हुकिल का। अब तक 46 आदमखोर गुलदार को ढेर कर चुके और सात को पिंजड़े में कैद करा चुके शिकारी हुकिल गुलदार के व्यवहार पर बारीकी से नजर रखते हैं। ज्वॉय की मानें तो उत्तराखंड में गुलदारों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन वन विभाग के पास इनका सही आंकड़ा नहीं है। ऐसे में इंतजाम भी कैसे होंगे।

उत्तराखंड: सावधान! आंगन तक बेखौफ पहुंच रहे खूंखार गुलदार, 23 सालों में 514 को बनाया निवाला, पढ़ें खास रिपोर्ट

कहा, भोजन की कमी इन्हें नरभक्षी बना रही है। उत्तराखंड में पांच वर्ग किमी में पांच से छह गुलदार घूम रहे हैं। इनका मूवमेंट इंसानी बस्तियों के आसपास है। जंगल में भोजन की कमी के कारण 80 प्रतिशत गुलदार पालतू पशुओं पर निर्भर हैं। इन्हें गोली मारना स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन समस्या के समाधान के लिए शोध के साथ दीर्घकालीन योजना पर काम करना जरूरी है। ज्वॉय कहते हैं, गुलदार इंसान से बेहतर शिकारी है, केवल बंदूक का फर्क है। हमारे पास बंदूक होती है और उसके पास नहीं।

जब हम गोली चलाते हैं, चोट हमारे दिल पर भी लगती है

ज्वॉय कहते हैं, जबकि किसी नरभक्षी को अपनी गोली का निशाना बनाते हैं, उन्हें भी दर्द होता है, लेकिन यह प्रकृति का दस्तूर है, यहां कई बार इंसान को भी गलती की सजा मौत के रूप में दी जाती है।

शिकारियों की भूमिका अहम है

ज्वॉय के अनुसार, उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में लाइसेंसी शिकारी अहम भूमिका निभा रहे हैं। यदि वह शिकार चुनकर आदमखोर को न मारें तो लोग गुस्से में दूसरे निर्दोष वन्य प्राणी को शिकार बना सकते हैं। एक लाइसेंसी शिकारी पूरी तरह आश्वस्त होने के बाद ही गोली चलाता है।

 

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *