गोरखपुर में चला बुलडोजर: शहर के चौड़ीकरण में बाधक बनीं 56 दुकानें, किया गया ध्वस्त

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अल्टीमेटम की मियाद खत्म होने के बाद पीडल्ब्यूडी, नगर निगम और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम ने असुरन चौराहे के चौड़ीकरण में बाधक बनी 56 दुकानों को ध्वस्त कर दिया। इनमें नगर निगम की 27 और रेलवे की 29 दुकानें शामिल थीं। इस दौरान अधिकांश दुकान डबडबाई आंखों से कार्रवाई देखते रहे। वहीं, कार्रवाई के दौरान कुछ दुकानदारों ने विरोध भी किया लेकिन संयुक्त टीम ने उनकी एक नहीं सुनी और दोपहर बाद करीब तीन बजे तक सभी दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करीब चार घंटे चली। इस दौरान जिला प्रशासन और पीडल्ब्यूडी के अधिकारी मौजूद रहे।

असुरन-मेडिकल फोरलेन का निर्माण पूरा हो गया है, लेकिन चौराहा चौड़ा नहीं होने से ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। ऐसे में भारी संख्या में पुलिस बल के साथ पीडल्ब्यूडी और नगर निगम की संयुक्त टीम करीब 11 बजे चौराहे पर पहुंची। पहले से चिह्नित करीब 56 दुकानों को दो हाइड्रा से ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई।

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करीब 11 बजे शुरू हुई कार्रवाई दोपहर तीन बजे तक चली। सबसे पहले रेलवे की करीब 29 दुकानों को ध्वस्त किया गया। इसके बाद पिपराइच रोड पर नगर निगम की 10 दुकानों को ध्वस्त कर दिया गया। असुरन से लेकर धर्मशाला रोड पर भी नगर निगम की 17 दुकानों को ध्वस्त किया गया। अतिक्रमण कर बनाई गई एक दुकान को भी टीम ने गिरा दिया। कार्रवाई के दौरान दुकानदारों ने विरोध भी किया। पहले उन्होंने दुकानों से सामान निकालने की मांग रखी। लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। कार्रवाई के दौरान पंखे, बल्ब, लकड़ी और लोहे के रैक भी टूट गए।

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दवा कारोबारी की हजारों की दवाएं भी कार्रवाई के दौरान बर्बाद हो गईं। कार्रवाई में शृंगार की एक निजी दुकान भी ध्वस्त हो गई। कुछ इसे अतिक्रमण बता रहे थे। हालांकि दुकानदार इसे निजी संपत्ति बताकर विरोध करते हुए दिखे। दुकानदारों ने कहा कि डबल इंजन की सरकार गरीबों का उत्पीड़न कर रही है। कार्रवाई के दौरान एडीएम सिटी विनीत सिंह, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार, सहायक अभियंता रोनित सिंह, नगर निगम के तहसीलदार सतीश श्रीवास्तव, आरआई अवध श्रीवास्तव, राम सुचित, अनिल सिंह आदि उपस्थित रहे।

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कार्रवाई के दौरान जाम से भी लोग हुए परेशान

ध्वस्तीकरण के दौरान असुरन से बिछिया, पिपराइच रोड के साथ मेडिकल रोड पर गाड़ियों का लंबा रेला लग गया। इसकी वजह से लोगों को परेशानी भी झेलनी पड़ी। दरअसल, कौवाबाग पुलिस चौकी के अलावा मेडिकल कॉलेज रोड पर भी चौपहिया वाहनों को जाने से रोक दिया गया था। हालांकि ट्रैफिक पुलिस के जवान और पुलिस के जिम्मेदार सक्रिय नजर आए। स्कूली बसों को भी लंबा चक्कर लगाना पड़ा। हर कोई कार्रवाई की तस्वीर मोबाइल में कैद करता दिखा।

कमिश्नर से लेकर नगर आयुक्त से मिले थे दुकानदार

बृहस्पतिवार को नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम के सदस्यों ने दुकानदारों को सामान हटाने के संबंध में अल्टीमेटम दिया था। कार्रवाई से परेशान दुकानदारों ने बृहस्पतिवार को कमिश्नर रवि कुमार एनजी से मुलाकात की थी। कमिश्नर ने रेलवे, नगर निगम के साथ ही पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों से वार्ता करने का आश्वासन दिया था। दुकानदार सुनील कुमार गुप्ता, रमेश गुप्ता, अजय, महेश अग्रहरि, सतीश गुप्ता आदि का कहना था कि हम विकास के विरोध में नहीं हैं। लेकिन किसी की रोजी रोटी नहीं छिननी चाहिए। दुकान के पीछे रेलवे की काफी जमीन है। उस जमीन में दुकानों को शिफ्ट किया जाए तो कई परिवारों को बर्बाद होने से बचाया जा सकता है। दुकानों को तोड़े जाने से कई परिवार सड़क पर आ गए हैं।

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मॉडल सड़क के लिए चौराहे का हो रहा चौड़ीकरण

असुरन चौराहे से मेडिकल काॅलेज के आगे तक बने फोरलेन को मॉडल सड़क बनाया गया है। 400 करोड़ से अधिक की लागत से बनी इस सड़क को मॉडल सड़क बनाने के लिए कई दुकानों और मकानों को तोड़ा गया था। उस समय भी तमाम विरोध हुआ था, लेकिन प्रशासन की तरफ से जमीन ओर मकान दुकान मालिकों को मुआवजा देकर जमीन का अधिग्रहण किया गया। फिर वहां पर फोरलेन का निर्माण कराया गया। फोरलेन के साथ ही असुरन चौराहे का चौड़ीकरण किया जाना था। लेकिन, वहां पर रेलवे और नगर निगम की दुकान होने के कारण चौराहे का चौड़ीकरण नहीं हो पा रहा था।


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