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डोमिनगढ़ से कौड़ियां फोरलेन जाने वाले बंधे की धंसी सड़क।
– फोटो : अमर उजाला।
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मानसून सिर पर है। अभी तक लोग लू और गर्मी से बेहाल थे, लेकिन अब बंधों में बने बड़े-बड़े होल और कटान से डर लगने लगा है। सीएम के निर्देश के बावजूद अफसरों ने इन बांधों की मरम्मत ही नहीं कराई। करीब 11 किलोमीटर में बने डोमिनगढ़-गाहासाड़ बांध को ही ले लीजिए।
शहर के पश्चिमी सीमा की सुरक्षा के लिए इसे बनाया गया है। इस बांध पर छोटे-बड़े मिलाकर 50 से ज्यादा गड्ढे हो गए हैं। ये गड्ढे भी नदी की छोर की ओर हैं। यानी अगर राप्ती और रोहिन उफनाईं तो इन बांधों के टूटने का खतरा बढ़ जाएगा।
राप्ती नदी के किनारे डोमिनगढ़ पुल से गाहासाड़ तक 11 किलोमीटर लंबाई में बांध बना हुआ है। डोमिनगढ़ से बंधा शुरू होते ही एक ओर रोहिन तो दूसरी ओर राप्ती नदी है। इस बंधे पर पीडब्ल्यूडी के निर्माण खंड तीन की ओर से वर्ष 2021 में पिच रोड बनाकर चौड़ीकरण कराया गया था।
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दरअसल बाढ़ आने पर राप्ती का पानी बंधे तक चढ़ जाता है। डोमिनगढ़ से आगे बढ़ने पर अवध चौराहा है। यहां पर दोनों ओर सड़क की पटरियां धंसी हुई हैं। इसे पाटने के लिए करीब आधा किमी तक जगह-जगह मिट्टी का ढेर रखा गया है। लेकिन, गड्ढे को भरा ही नहीं गया। इस बांध पर उत्तरासोत गांव के सामने चार जगह रेन कट हैं। जबकि, यह बांध वर्ष 2017 में आई बाढ़ में टूट गया था और कई गांव बाढ़ में डूब गए थे।
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