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गोरखपुर मियां साहब इमामबाड़ा
– फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर महानगर के मियां बाजार में स्थित मियां साहब इमामबाड़ा सामाजिक एकता व अकीदत का केंद्र है। यह हिंदुस्तान में सुन्नी संप्रदाय का सबसे बड़ा इमामबाड़ा है। इमामबाड़े के दरोदीवार व सोने-चांदी की ताजिया में अवध स्थापत्य कला व कारीगरी रची-बसी नजर आती है। इमामबाड़ा के गेट पर अवध का राजशाही चिह्न भी बना हुआ है। करीब तीन सौ सालों से हजरत सैयद रौशन अली शाह की ओर से जलाई धूनी आज भी जल रही है। इस्टेट की ऐतिहासिक इमारत इतिहास का जीवंत दस्तावेज है।
मियां साहब इमामबाड़ा इस्टेट के संस्थापक हजरत सैयद रौशन अली शाह ने 1717 ई. में इमामबाड़ा का निर्माण कराया था। विकीपीडिया में भी इमामबाड़ा की स्थापना तिथि 1717 ई. दर्ज है। वहीं ‘मशायख-ए-गोरखपुर’ किताब में इमामबाड़ा की तारीख 1780 ई. दर्ज है। इसी समय मस्जिद व ईदगाह भी बनीं। हजरत सैयद रौशन अली शाह बुखारा के रहने वाले थे। वह मोहम्मद शाह के शासनकाल में बुखारा से दिल्ली आए। इतिहासकार डाॅ. दानपाल सिंह की किताब गोरखपुर-परिक्षेत्र का इतिहास (1200-1857 ई.) खंड प्रथम में गोरखपुर और मियां साहब नाम से पेज 65 पर है कि यह एक धार्मिक मठ है, जो गुरु परंपरा से चलता है।
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